समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण, तर्पण, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की कई बाधाएं दूर हो सकती हैं। इस वर्ष आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। यदि आप जीवन में सुख-समृद्धि, उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं, तो इस दिन कुछ पारंपरिक उपाय किए जा सकते हैं।
तरक्की और सफलता के लिए करें यह उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या के दिन तुलसी के पौधे की थोड़ी-सी मिट्टी लेकर उसमें पानी मिलाकर लेप तैयार करें। स्नान से पहले इस लेप को शरीर पर लगाएं और उसके बाद स्नान करें। फिर भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें। मान्यता है कि इससे जीवन में प्रगति के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए
- यदि आप विरोधियों या अनावश्यक शत्रुता से परेशान हैं, तो इस दिन भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करते हुए उनके द्वादश (12) नामों का स्मरण करें।
- भगवान विष्णु के 12 नाम – अच्युत, अनंत, दामोदर, केशव, नारायण, श्रीधर, गोविंद, माधव, हृषीकेश, त्रिविक्रम, पद्मनाभ और मधुसूदन।
पितृ दोष की शांति के लिए
आषाढ़ अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध कर्म तथा जरूरतमंद लोगों को भोजन और वस्त्रों का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इससे पितृ दोष की शांति होती है और परिवार पर पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है।
उन्नति पर बुरी नजर से बचाव
यदि आपको लगता है कि आपकी प्रगति में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, तो इस दिन नमक युक्त कोई खाद्य पदार्थ गाय को खिलाएं। लोक मान्यताओं के अनुसार, यह उपाय नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करने वाला माना जाता है।
घर में सुख-समृद्धि के लिए
एक कच्चा नारियल लेकर उस पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं और भगवान विष्णु को अर्पित करें। पूजा पूरी होने के बाद उस नारियल का प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों में बांट दें। मान्यता है कि इससे परिवार में प्रेम, सुख और समृद्धि बनी रहती है।
नकारात्मक ऊर्जा दूर करने का उपाय
अमावस्या के दिन स्नान के बाद हल्दी और पानी का पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट से घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
आषाढ़ अमावस्या का महत्व
आषाढ़ अमावस्या को आत्मचिंतन, पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और दान-पुण्य करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों को आध्यात्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। साथ ही भगवान विष्णु की आराधना, तर्पण और सेवा-भाव से किए गए दान को विशेष फलदायी बताया गया है।



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