-लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों से मची धूम, युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का दिया संदेश
-सांसद अजय भट्ट ने कहाकृलोक संस्कृति हमारी पहचान, नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी
समाचार सच, हल्द्वानी। रिपोर्ट- नीरू भल्ला।
देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से हल्द्वानी में भव्य ‘झोड़ा उत्सव’ का शुभारंभ हुआ। उत्सव के दौरान उत्तराखंड की लोक परंपराओं का ऐसा रंग देखने को मिला कि पूरा वातावरण पहाड़ की संस्कृति और लोक संगीत से सराबोर हो उठा।
झोड़ा उत्सव का शुभारम्भ करते हुए मुख्य अतिथि एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री और नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सांसद अजय भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराएं हमारी पहचान और हमारी जड़ों से जुड़ी हुई हैं। झोड़ा, लोकगीत और पारंपरिक लोकनृत्य केवल मनोरंजन के माध्यम नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में हमारी युवा पीढ़ी तेजी से बदलती जीवनशैली को अपना रही है। ऐसे समय में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। झोड़ा उत्सव जैसे कार्यक्रम युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और पहाड़ की विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।
अजय भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड की लोक कलाओं और पारंपरिक विधाओं को संरक्षित करने के साथ-साथ उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने आयोजकों को इस पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश की संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं की भागीदारी से ही हमारी लोक परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुंच सकेंगी।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति केवल गीत-संगीत और नृत्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की पहचान, इतिहास, परंपरा और सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। आधुनिकता के दौर में जब युवा तेजी से बदलती जीवनशैली की ओर बढ़ रहे हैं, ऐसे में झोड़ा जैसे पारंपरिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना बेहद जरूरी है।
मुख्य वक्ता भाजपा उत्तराखंड के प्रदेश प्रकोष्ठ प्रभारी कौस्तुभ जी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली को अपनाने के साथ युवाओं को अपनी मूल संस्कृति और परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘झोड़ा उत्सव’ जैसे आयोजन युवा पीढ़ी को उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
झोड़ा उत्सव में विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे छात्र-छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। पारंपरिक लोकगीतों, लोकनृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों और छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को खास बना दिया। एक ओर जहां लोकगीतों की मधुर धुनों ने पहाड़ की संस्कृति की याद दिलाई, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक नृत्यों ने सभागार में मौजूद लोगों को उत्तराखंडी रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक जितेंद्र मेहता ने की। मंच का संचालन प्रदेश सह-संयोजक विनोद भट्ट एवं जिला सह-संयोजक प्रियंका जोशी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, हल्द्वानी मेयर गजराज बिष्ट, साकेत अग्रवाल, हुकूम सिंह कुंवर सहित कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। जबकि भव्य झोड़ा उत्सव के सफल आयोजन में जिला संयोजक देवेंद्र बिष्ट, कैलाश चंद्र जोशी, संदीप सिंह भोज, किशोर जोशी, कमल पांडे, चंदन किरोला तथा पार्षद चंदन मेहता का विशेष योगदान रहा।
आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य उत्तराखंड की पारंपरिक विरासत को केवल मंच तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे नई पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाना है। झोड़ा उत्सव के माध्यम से लोक संस्कृति, लोककला और पारंपरिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया गया।

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