भवाली नरेश पांडे प्रकरणः पहली शिकायतकर्ता बनी आरोपी, कोर्ट ने पुलिस रिमांड ठुकराकर दी जमानत

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12 घंटे की पूछताछ, मेडिकल और कोर्ट पेशी के बाद राहत, अदालत बोली- उपलब्ध तथ्यों में रिमांड का पर्याप्त आधार नहीं

समाचार सच, नैनीताल। भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडे से जुड़े बहुचर्चित दुष्कर्म प्रकरण में शुक्रवार को एक ऐसा कानूनी घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। जिस युवती की शिकायत पर नरेश पांडे के खिलाफ यौन शोषण सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था, उसी युवती को अब पुलिस ने इस मामले में आरोपी के रूप में न्यायालय में पेश किया। हालांकि, पुलिस को अदालत से उस समय झटका लगा जब उसकी पुलिस रिमांड की मांग अस्वीकार कर दी गई और युवती को 30 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई।

पुलिस ने युवती से मल्लीताल कोतवाली में करीब 12 घंटे तक गहन पूछताछ की। इसके बाद उसका मेडिकल परीक्षण बीडी पांडे अस्पताल में कराया गया और फिर जिला न्यायालय में पेश किया गया। जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने रिमांड की मांग रखी, लेकिन अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों का परीक्षण करने के बाद इसे उचित नहीं माना।

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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-64 का भी उल्लेख किया और कहा कि इस धारा के तहत अपराध की परिभाषा पुरुष द्वारा किए गए कृत्य के संदर्भ में की गई है। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में ऐसे ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किए गए, जिनसे पुलिस रिमांड आवश्यक प्रतीत हो। साथ ही, सर्वाेच्च न्यायालय के सत्येंद्र कुमार अंतिल मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया कि सात वर्ष तक की सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होनी चाहिए।

कोर्ट ने यह भी माना कि संबंधित युवती स्थानीय निवासी है और जांच में सहयोग नहीं करने जैसी कोई परिस्थिति पुलिस की ओर से नहीं दर्शाई गई। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने रिमांड याचिका खारिज कर युवती को निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।

युवती की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने दावा किया कि पुलिस रिमांड की मांग के समर्थन में अदालत के समक्ष कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। उनका कहना था कि न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही जमानत का निर्णय सुनाया।

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पुलिस का आरोप है कि संबंधित युवती ने नरेश पांडे के साथ मिलकर अन्य महिलाओं को उसके संपर्क में लाने और उनके साथ संबंध स्थापित कराने में सहयोग किया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

गौरतलब है कि इसी युवती की शिकायत पर नरेश पांडे के खिलाफ यौन शोषण, जबरन गर्भपात कराने, धमकी देने और अन्य गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में अग्रिम जमानत के लिए जिला न्यायालय और उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बावजूद नरेश पांडे को राहत नहीं मिली थी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब पहली शिकायतकर्ता के आरोपी बनाए जाने और उसे अदालत से जमानत मिलने के बाद यह चर्चित मामला एक नई कानूनी दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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