पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पंत के सहयोग से 14 से 18 जुलाई तक चलेगा हरेला महोत्सव, 500 पौधों के रोपण के साथ विकसित होगा फल उद्यान और मियावाकी वन।
समाचार सच, हल्द्वानी। हरेला पर्व के अवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू), हल्द्वानी में 14 से 18 जुलाई तक वृहद पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान चलाया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस दौरान परिसर में लगभग 500 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अभियान के तहत फल उद्यान विकसित करने के साथ-साथ मियावाकी पद्धति पर आधारित मिश्रित वन तैयार करने की भी योजना बनाई गई है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि हरेला केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति सामाजिक दायित्व निभाने का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस पर्व को जनभागीदारी से जोड़ते हुए हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचाने का प्रयास करेगा।
उन्होंने प्रदेशवासियों से भी अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनकी नियमित देखभाल करने तथा पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की अपील की। उनका कहना था कि एक पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
हरेला महोत्सव के संयोजक डॉ. एच.सी. जोशी ने बताया कि अभियान के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में पुष्पीय, फलदार, छायादार और औषधीय प्रजातियों के करीब 500 पौधों का रोपण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान मैं पर्यावरणविद् एवं सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराने के साथ सक्रिय रूप से योगदान देंगे । यह सहयोग पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के प्रति उनके सतत समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में कुलपति, विशिष्ट अतिथि, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी सामूहिक रूप से पौधारोपण करेंगे तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेंगे। अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित वातावरण तैयार करना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार पौधारोपण के लिए परिसर में विभिन्न स्थानों का चयन किया जा चुका है। इनमें विशेष रूप से फल उद्यान और मियावाकी तकनीक पर आधारित मिश्रित वन विकसित किया जाएगा। इस पहल से परिसर की जैव विविधता बढ़ाने, हरित आवरण को मजबूत करने, कार्बन अवशोषण में वृद्धि करने और विश्वविद्यालय को प्रकृति संरक्षण के एक जीवंत मॉडल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।



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