उत्तराखंड में बड़ा बदलाव: धामी सरकार ने मदरसों की सरकारी सहायता पर लगाया ब्रेक, अब नए नियमों से होगी मान्यता

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2027-28 से खत्म होगा अनुदान, बिना नई मान्यता नहीं चल सकेंगे मदरसे, 50 हजार छात्रों पर पड़ेगा असर

समाचार सच, देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए अरेबिया मदरसों को दिए जाने वाले सरकारी अनुदान को समाप्त करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अब वित्तीय वर्ष 2027-28 से मदरसों के लिए अलग से अनुदान का प्रावधान नहीं रहेगा।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम और गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम 30 जून 2026 को समाप्त हो चुके हैं। इसके स्थान पर 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू हो गया है, जिसके तहत प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए एक समान मान्यता प्रणाली लागू की गई है।

अब नई मान्यता के बिना नहीं होगा संचालन
राज्य में मदरसा बोर्ड से पंजीकृत 452 मदरसे संचालित हैं। नई व्यवस्था के तहत इन सभी संस्थानों को अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी। निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद ही उन्हें संचालन की अनुमति मिलेगी।

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करीब 50 हजार छात्र होंगे नई व्यवस्था का हिस्सा
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अनुसार प्रदेश के 452 मदरसों में लगभग 50 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें 400 मदरसों में कक्षा 1 से 8 तक तथा 52 मदरसों में कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई कराई जाती है।

दो पालियों में होगी पढ़ाई
नई शिक्षा व्यवस्था के तहत मदरसों में पढ़ाई दो पालियों में होगी। सुबह की पाली में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे आधुनिक विषय पढ़ाए जाएंगे, जबकि शाम की पाली में धार्मिक शिक्षा के साथ संविधान, मानवाधिकार, राष्ट्रीय एकता और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जाएगी।

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सरकार का कहना है कि जो संस्थान निर्धारित शैक्षणिक मानकों को पूरा करेंगे, उनके विद्यार्थियों को राज्य शिक्षा बोर्ड से प्रमाणपत्र भी प्राप्त होगा।

अब तक इतने संस्थानों ने किया आवेदन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक 158 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। वहीं 1 जुलाई के बाद 9 अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता दी जा चुकी है, जिनमें 7 मदरसे, एक सिख समुदाय का स्कूल और एक जैन समुदाय का स्कूल शामिल हैं।

मानकों पर होगी जांच
सरकार के अनुसार सभी संस्थानों का शिक्षा विभाग के मानकों के आधार पर भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराया जाएगा। जो संस्थान मानकों पर खरे उतरेंगे, उन्हें मान्यता दी जाएगी। जिन संस्थानों में कमियां पाई जाएंगी, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक सुधार करने का अवसर दिया जाएगा।

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