काले तिल के सेवन से लम्बे समय तक एनर्जेटिक रहते हैं

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। काले तिल हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है जिससे हम लम्बे समय तक एनर्जेटिक रहते हैं। मगर काले तिल के अत्यधिक सेवन के कुछ स्वास्थ्य संबंधी नुकसान भी हो सकते हैं इसलिए इसका सीमित मात्रा में ही उपभोग करना चाहिए।
काले तिल के फायदे
-काले तिल के नियमित सेवन से हम कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचे रह सकते हैं। इसमें कई प्रकार के विटामिन्स एवं जरुरी खनिजों के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं जिनसे कैंसर का खतरा कम होता है। इसके अलावा इसमें फाइटेट भी पाया जाता है जो हमारे शरीर से मुक्त कणों के प्रभाव को कम करने का कार्य करता है। यह हमें हृदय की बीमारी के साथ-साथ स्तन कैंसर, फेफड़े का कैंसर, ल्यूकेमिया, अग्न्याशय कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर एवं प्रोस्टेट कैंसर को भी कम करने में बेहद सहायक होता है।
-काले तिल का तेल के सेवन से उच्च रक्तचाप की समस्या से भी बचा जा सकता है। इसके सेवन से हमारे हृदय की कार्य प्रणाली का तनाव कम होता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा भी कम हो जाता है। इसके अलावा इसमें मौजूद मैग्नीशियम के सकारात्मक प्रभाव से हाइपरटेंशन की समस्या से भी छुटकारा मिलता है। काले तिल के मौजूद जरूरी खनिजों की सहायता से हम सेहतमंद रहते हैं।
-काले तिल के नियमित सेवन से मधुमेह की समस्या में राहत मिलती है। यह हमारे शरीर में इंसुलिन एवं ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित रखने में मदद करता है जिससे मधुमेह के लक्षणों को आसानी से कम किया जा सकता है। इसके सेवन से टाइप-2 मधुमेह की समस्या से जूझ रहे रोगियों को भी फायदा मिलता है।
-काले तिल खाने से हमारी हड्डियां मजबूत रहती हैं। इसमें फॉस्फोरस एवं कैल्शियम की अधिक मात्रा पायी जाती है जो हमारी हड्डियों के स्वास्थ्य एवं विकास के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। इसके उपयोग से हमारी टूटी हड्डियों को वापस जुड़ने में बहुत मदद मिलती है।
-काले तिल के नियमित सेवन से हमारी पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है। इसमें फाइबर की पर्याप्त मात्रा पायी जाती है जो हमारे पाचन को स्वस्थ रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हमारी पेट संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज, गैस और एसिडिटी की संभावना को कम करने में बेहद लाभकारी सिद्ध होते हैं। इसके अलावा यह आंतों को सुचारू रूप से चलाने में बेहद मददगार साबित होते हैं।
-काले तिल के उपभोग से गठिया के रोग में बहुत फायदा मिलता है। इसमें तांबा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो गठिया के दर्द एवं सूजन दोनों के प्रभाव को कम करने में बेहद फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व हमारी रक्त वाहिकाओं, जोड़ों एवं हड्डियों को ताकत प्रदान करने का कार्य करता है। इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम भी उचित मात्रा में पाया जाता है जो हमें अस्थमा एवं अन्य श्वास संबंधी समस्याओं से बचाने में मदद करता है।
-काले तिल के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने में बहुत मदद मिलती है। इसमें सेसमोलिन और सेसामीन नामक दो पदार्थ पाए जाते हैं एक फाइबर का समूह होते हैं। इनके प्रभाव से हमारे शरीर का कोलेस्ट्रॉल तेजी से कम होता है। इसके अलावा इसमें फाइटोस्टेरॉल पाया जाता है जो हमारे कोलेस्ट्रॉल घटाने में बेहद लाभकारी माना जाता है।
काले तिल के नुकसान
-काले तिल के अत्यधिक सेवन से दस्त जैसी समस्या हो सकती है क्योंकि इसमें अच्छे रेचक गुण पाए जाते हैं जिनकी अधिक मात्रा होने में पेट में दस्त जैसी परेशानी भी हो सकती है। इसलिए काले तिल का उचित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।
-काले तिल के बीजों का अत्यधिक सेवन करने से पेट एवं बृहदान्त्र में जलन की समस्या भी हो सकती है।
-काले तिल के अत्यधिक सेवन से त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। यह हमारी त्वचा पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं जिस के अधिक सेवन से त्वचा पर लालिमा एवं खुजली जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।
-गर्भवती महिलाओं को काले तिल के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में काले तिल का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर बेहद गर्म होती है जिसके अधिक सेवन से गर्भपात भी हो सकता है।

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