समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष 31 जुलाई 2026, शुक्रवार से चोर पंचक का आरंभ हो रहा है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है, ताकि अनावश्यक बाधाओं, आर्थिक नुकसान और अन्य परेशानियों से बचा जा सके।
क्या होता है पंचक?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र तक रहता है, तब पंचक काल बनता है। यह अवधि लगभग पांच दिनों की होती है और इस दौरान कई शुभ कार्यों में सावधानी बरतने की परंपरा है।
31 जुलाई से शुरू होगा चोर पंचक
वर्ष 2026 में पंचक की शुरुआत 31 जुलाई, शुक्रवार से हो रही है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जिस दिन से पंचक प्रारंभ होता है, उसी के आधार पर उसका स्वरूप निर्धारित किया जाता है। शुक्रवार से शुरू होने के कारण इसे चोर पंचक कहा जाता है। पंचक की समाप्ति तब होती है, जब चंद्रमा रेवती नक्षत्र से आगे बढ़ जाता है।
पंचक में किन कार्यों से बचने की सलाह?
प्राचीन ज्योतिष ग्रंथ ‘मुहूर्त चिंतामणि’ में पंचक के दौरान कुछ कार्यों को वर्जित बताया गया है। ग्रंथ में उल्लेख है—
“अग्नि-चौरभयं रोगो राजपीडा धनक्षतिः।
संग्रहे तृण-काष्ठानां कृते वस्वादि-पंचके।।”
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान—
- लकड़ी या ईंधन का संग्रह करने से बचें।
- नया पलंग खरीदने या बनवाने से परहेज करें।
- घर की छत का निर्माण या ढलाई शुरू न करें।
- दक्षिण दिशा की यात्रा टालना शुभ माना जाता है।
- बड़े और महत्वपूर्ण कार्य करने से पहले शुभ मुहूर्त अवश्य देखें।
मान्यता है कि इन नियमों की अनदेखी करने से अग्नि भय, चोरी, रोग, राजकीय बाधा या धन हानि जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि ये मान्यताएं धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित हैं।
पंचक के पांच प्रकार
ज्योतिष शास्त्र में पंचक को पांच प्रकार का बताया गया है—
- रविवार से शुरू हो – रोग पंचक
- सोमवार से शुरू हो – राज पंचक
- मंगलवार से शुरू हो – अग्नि पंचक
- शुक्रवार से शुरू हो – चोर पंचक
- शनिवार से शुरू हो – मृत्यु पंचक
चूंकि इस वर्ष पंचक की शुरुआत शुक्रवार, 31 जुलाई से हो रही है, इसलिए इसे चोर पंचक कहा जाएगा।
क्या रखें ध्यान?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पंचक के दौरान यदि कोई महत्वपूर्ण कार्य करना आवश्यक हो तो किसी योग्य विद्वान या ज्योतिषाचार्य से शुभ मुहूर्त की सलाह लेना उचित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं का उद्देश्य सावधानी और शुभ समय का पालन करना है, जिससे कार्यों में सफलता और सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकें।

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