समाचार सच, देहरादून।
उत्तराखंड में शहरी विकास को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने का स्पष्ट संदेश दिया है। मुख्यमंत्री आवास में हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल फाइलों और कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने मास्टर प्लान, आवासीय परियोजनाओं, पार्किंग, नागरिक सुविधाओं, सौंदर्यीकरण और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई सहित सभी कार्यों के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंबित योजनाओं की अलग-अलग समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा।
15 दिन में सुधरेंगी प्राधिकरण क्षेत्र की सड़कें
सड़कों की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने गंभीर नाराजगी जताते हुए प्राधिकरणों के अधीन आने वाली सभी सड़कों का सर्वे कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां सड़कें खराब हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत और सुधार कराया जाए।
सीएम ने अगले 15 दिनों के भीतर प्राधिकरण क्षेत्रों की सड़कों को बेहतर स्थिति में लाने के निर्देश दिए। साथ ही सड़क निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा।
15 अक्टूबर तक पूरा होगा सौंदर्यीकरण
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण कार्यों को भी प्राथमिकता देने को कहा। सभी विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में इसी माह से काम शुरू करने और 15 अक्टूबर तक सौंदर्यीकरण पूरा करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि सौंदर्यीकरण का स्तर आकर्षक और प्रभावी होना चाहिए। बजट की आवश्यकता होने पर उसकी व्यवस्था की जाए, लेकिन धन की कमी को काम में देरी का कारण नहीं बनाया जाएगा।
अवैध निर्माण पर अब तकनीक से नजर
अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नई तकनीक का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण पूरा होने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती स्तर पर ही अवैध निर्माण को चिन्हित किया जाना चाहिए।
इसके लिए GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने को कहा गया है। प्रत्येक विकास प्राधिकरण में इलीगल कंस्ट्रक्शन मॉनिटरिंग डैशबोर्ड तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें शिकायत या संदिग्ध निर्माण से लेकर निरीक्षण, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण तक की स्थिति रियल टाइम में दर्ज की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि यदि किसी अवैध निर्माण में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
नक्शा पास कराने की प्रक्रिया होगी आसान
सीएम ने ऑनलाइन भवन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को जिला स्तरीय सभी विकास प्राधिकरणों से जोड़ने और प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि लोगों को भवन मानचित्र स्वीकृति के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
विकास प्राधिकरणों की वेबसाइट को भी नागरिकों के लिए आसान बनाने और योजनाओं, शुल्क, नियमों तथा सेवाओं की जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराने को कहा गया। इसके लिए प्रस्तावित चैटबॉट जैसी तकनीकी सुविधाओं का इस्तेमाल बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।
हर शहर में सिटी पार्क, पिंक टॉयलेट पर जोर
मुख्यमंत्री ने सभी शहरों में सिटी पार्क विकसित करने के निर्देश दिए। प्रत्येक सिटी पार्क में सामान्य शौचालय के साथ पिंक टॉयलेट की व्यवस्था अनिवार्य करने को कहा गया। शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार पिंक टॉयलेट विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने अगली समीक्षा बैठक तक इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत पूरा करने को कहा। सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की जरूरतों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया।
देहरादून-हरिद्वार में पार्किंग का बनेगा प्लान
बढ़ते शहरीकरण के बीच पार्किंग की समस्या को लेकर भी मुख्यमंत्री ने ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में पर्याप्त पार्किंग सुविधा नहीं रखने वाले नगर निकायों को चिन्हित कर मल्टी-लेवल, सरफेस, पेरीफेरल और PPP मॉडल के माध्यम से पार्किंग विकसित करने को कहा गया।
PM आवास योजना की भी होगी समीक्षा
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी जिलों में योजना का लाभ प्राप्त कर चुके अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और BPL परिवारों की विस्तृत सूची तैयार कर 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचना चाहिए और आवासीय परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जानी चाहिए।
लैंड पूलिंग के लिए 2-3 क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट
सीएम धामी ने लैंड पूलिंग योजना को लेकर भी अधिकारियों को पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा। कम से कम 2 से 3 विकास क्षेत्रों में योजना लागू करने की कार्ययोजना बनाने और भूमि मालिकों को होने वाले लाभ का स्पष्ट एवं पारदर्शी मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की योजनाओं में किसानों और भूमि मालिकों के हितों को स्पष्ट रूप से सुरक्षित किया जाना चाहिए।
ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्राधिकरण क्षेत्रों में आने वाले ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों में भी स्ट्रीट लाइट, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाएं विकसित की जाएं।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी अब स्वीकार नहीं होगी। हर योजना की समय-सीमा तय होगी, उसकी नियमित मॉनिटरिंग होगी और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

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