समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। पानी ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स को शरीर में पहुंचाने का काम करता है। खून का 55 प्रतिशत हिस्सा प्लाज्मा और बाकी का 45 प्रतिशत रेड ब्लड सेल, व्हाइट ब्लड सेल और प्लेटलेट्स से बना होता है। असल में प्लाज्मा मूल रूप से पानी ही होता है। हमारे शरीर का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पानी है। वैज्ञानिक पहलू की बात करें तो रोने से पानी के साथ-साथ कुछ हार्माेन जिनके कारण स्ट्रेस लेवल या रोना कंट्रोल होता है जैसे सेरोटोनिन शरीर से बाहर निकलते हैं। जिसके कारण रोने के बाद हमें रिलैक्स करने के लिए और हार्माेन लेवल को बढ़ाने कि लिए पानी का गिलास आगे बढ़ा दिया जाता है।
पानी पीने से प्लाज्मा कोर्टिसोल मेंटेन रहता है।
गुस्सा आए तो क्यों पिलाते हैं पानी
शरीर में प्लाज्मा कोर्टिसोल लेवल होते हैं, जो इमोशन को ट्रिगर करते हैं। पानी पीने से एक्टिविटी चेंज होने के कारण दिमाग से चीजें डायवर्ट हो जाती हैं। इसके अलावा मूड खराब होने के कारण ब्लड वेसल में कंस्ट्रिक्शन होता है। जैसे ही हम पानी पीते हैं हमारा प्लाज्मा लेवल बढ़ता है, ब्लड वेसल कंस्ट्रिक्शन रिलीज होता है, जिससे स्ट्रेस और टेंशन कम हो जाता है।
पानी पीने से क्यों बदल जाता है मूड
ब्रेन में जो सेरेबेलम होता है वो हमारे इमोशनल पार्ट के रेगुलेट करता है। जब हम तनावग्रस्त होते हैं, तो एड्रेनल ग्लैंड कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्माेन का उत्पादन करता है। इसके कारण शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का स्तर कम हो सकता है इसलिए पर्याप्त पानी पीना चाहिए ताकि स्ट्रेस के कारण शरीर में होने वाले साइकोलॉजिकल और नेगेटिव प्रभाव कम हो सके।
बेहोश होने पर पानी के छींटे क्यों मारे जाते हैं
बेहोश होने पर पानी का छिड़काव करने पर ट्राइजेमिनल सिस्टम ट्रिगर होता है, जिसके कारण हम बेहोशी के स्टेट से बाहर आ सकते हैं। इसके अलावा होश में आने के बाद तुरंत पानी या ग्लूकोज पीना चाहिए। इससे ब्लड प्रेशर मैनेज होता है।


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