मातृशक्ति ने बेबाकी से रखी ‘समाचार सच’ के समक्ष अपनी राय
समाचार सच, हल्द्वानी। एक तरफ सरकार बेटी बचाओ व बेटी पढ़़ाओ का नारा दे रही है वहीं दूसरी तरफ उसे घर में ही प्रताड़ित और उसके अस्मत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस संदर्भ में समाचार सच की सह सम्पादक सुश्री नीरू भल्ला ने हल्द्वानी की महिलाओं की एक राय जानने का प्रयास किया। प्रस्तुत है उसके अंश-

नीमा भट्ट (पार्षद) नीमा भट्ट का कहना है कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए। महिलाओं के साथ जो इस प्रकार की घिनौनी हरकतें करता है, उसे तुरन्त फांसी की सजा का प्रावधान हो। उन्होंने कहा कि महिलाएं न तो पहले सुरक्षित थी और न अभी हैं। एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का संदेश दे रही हैै। वहीं समाज में इस प्रकार की घटनाओं का सामने आना शर्मनाक है।

दीप्ति खर्कवाल (गृहिणी) मां को अपने लड़कियों को मजबूत बनाना चाहिए और इस प्रकार की घटनाएं सामने आने पर आवाज भी उठानी चाहिए। ऐसे लोगों को कड़ा से कड़ा दंड देना चाहिए। उन्होेंने कहा कि हमें अपनी बेटियों को मजबूत बनाना चाहिए और उन्हें फिजीकली रूप से मजबूत बनाना चाहिए। वहीं इस प्रकार की घटनाओं में जो भी दोषी हो उसे तुरन्त दंड देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं सामने आने पर हमें उसे शेयर भी करना चाहिए।

जानकी रैंगाई (एनजीओ कार्यकर्ता) यह एक शर्मनाक मुद्दा है। जब घर की चाहरदीवारियों में ही महिला सुरक्षित नहीं है तो बाहर की कल्पना करना ही गलत है। हर मामले में बेटी का मुंह बन्द कर दिया जाता है। पिता और भाई की भूमिका पर भी सवाल उठने लग गये हैें। सरकार को इस मामले पर कानून तो बनाना ही चाहिए। साथ ही युवाओं को इस प्रकार की शिक्षा दी जानी चाहिए जिससे उनके दिमाग में कांसेप्ट समझ में आ जाना चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि लड़कियों को शारीरिक रूप से मजबूत बनाना चाहिए जिससे वे आने वाले खतरों से निपट सकें।

मुन्नी पांडे (एलआईसी अभिकर्ता) मुन्नी पांडे का कहना है कि इस मामले में दोषियों को सख्त सजा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर महिलाएं अपने घर में ही सुरक्षित नहीं हैं तो दूसरी जगह की उम्मीद ही करना बेकार हैै। उन्होंने कहा कि चूकिं उनकी भी दो छोटी बच्चियां हैं और वे उनके प्रति भी चिन्तित रहती है। उन्होंने कहा कि यह समाज व सरकार का सामूहिक कर्तव्य बनता है कि इस प्रकार की घटनाएं रोकने के लिए वे आगे आयें।

श्वेता फुलारा (गृहिणी) श्वेता का कहना है कि पारिवारिक मूल्य घटने के कारण भी इस प्रकार की घटनाएं हो रही हैं। अगर घर के अन्दर इस प्रकार की घटनाएं हो रही हैं तो इसके लिए हमारे नैतिक मूल्य भी दोषी हैं। हालाकि इसके लिए एक को ही दोषी ठहराना तर्कसंगत नहीं है लेकिन कहीं न कहीं हमें गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। आज इस प्रकार की घटनाएं हमारे समाज के लिए दर्दनाक है। उन्होेंने कहा हमें नैतिक शिक्षा देनी चाहिए जिससे ऐसी घटनाएं दोबारा न हो।

भावना बिष्ट (छात्रा) भावना का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं सुनकर ही शर्म आती हैं। आखिर इस प्रकार की घृणित घटनाएं क्यों घट रही हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार जहां बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ का संदेश दे रही है और वहीं इस प्रकार के मामले घटित होना सभ्य समाज के लिए कलंक है। वहीं भावना का कहना कि इस प्रकार की घटनाओं से यह पता चलता है कि हमारे समाज का नैतिक पतन होते जा रहा है।

ममता देवाल (छात्रा) ममता देवाल का कहना है कि समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है जिससे हमारे समाज में इस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं। अगर इस प्रकार की कुत्सित घटना घर के अन्दर हो जाये तो इससे और शर्मनाक क्या होगा। उन्होंने कहा कि हमारे पारिवारिक संस्कार भी दिन पर दिन दूषित होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज व सरकार को भी इस मामले में ठोस पहल करनी पड़ेगी।



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