डॉ. अंकिता चांदना ने युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव पर किया मंथन, बताया स्क्रीन टाइम का संतुलन क्यों जरूरी

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समाचार सच, हल्द्वानी।
मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में बढ़ता स्क्रीन टाइम अब बच्चों और युवाओं की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका अत्यधिक इस्तेमाल मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती भी बनता जा रहा है। इसी गंभीर विषय को लेकर हेल्थकेयर फिजियोथैरेपी सेंटर, मुखानी, हल्द्वानी में गुरुवार को विशेष जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। सेंटर की डायरेक्टर एवं सीनियर फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अंकिता चांदना ने सेमिनार में मानसिक तनाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी और तनाव को नियंत्रित करने के व्यावहारिक तरीके भी बताए।

सेमिनार का मुख्य फोकस मेंटल स्ट्रेस, मेंटल फॉग, एकाग्रता में कमी और लगातार स्क्रीन इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभावों पर रहा। डॉ. अंकिता चांदना ने बताया कि लंबे समय तक मोबाइल, सोशल मीडिया, लैपटॉप और अन्य डिजिटल स्क्रीन के संपर्क में रहने से बच्चों और युवाओं में मानसिक थकान के साथ चिड़चिड़ापन, फ्रस्ट्रेशन, बेचैनी और किसी काम पर फोकस करने में परेशानी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि खासतौर पर लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले युवाओं में वर्क रिलेटेड स्ट्रेस बढ़ने की संभावना रहती है। लगातार काम करने और पर्याप्त ब्रेक नहीं लेने से व्यक्ति मानसिक रूप से थका हुआ महसूस कर सकता है, जिसका असर उसकी एकाग्रता और कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। ऐसे में काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेना और शरीर को सक्रिय रखना बेहद जरूरी है।

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डॉ. अंकिता ने बताया 4-4-4 रूल
सेमिनार के दौरान डॉ. अंकिता चांदना ने तनाव को नियंत्रित करने के लिए आसान 4-4-4 ब्रीदिंग रूल समझाया। उन्होंने बताया कि चार सेकंड तक सांस अंदर लें, चार सेकंड तक सांस रोकें और फिर चार सेकंड में धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें। उन्होंने प्रतिभागियों को इसे शांत वातावरण में अभ्यास करने की जानकारी दी।

इसके अलावा उन्होंने 3-3-3 तकनीक के बारे में भी बताया। इसमें आसपास की तीन चीजों को ध्यान से देखना, तीन अलग-अलग आवाजों पर ध्यान देना और शरीर के तीन अलग-अलग हिस्सों को मूव करना शामिल है। इस तरह की गतिविधियों से व्यक्ति का ध्यान वर्तमान क्षण पर केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।

मोबाइल से दूरी ही नहीं, स्वस्थ दिनचर्या भी जरूरी
डॉ. अंकिता ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए केवल स्क्रीन टाइम कम करना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, बीच-बीच में स्ट्रेचिंग, पर्याप्त नींद और संतुलित एवं ताजा भोजन को दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है।

उन्होंने युवाओं को सकारात्मक सोच अपनाने, नकारात्मक और हानिकारक आदतों से बचने तथा अत्यधिक कैफीन के सेवन को सीमित करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि व्यस्त डिजिटल जीवन के बीच परिवार और दोस्तों के साथ बातचीत और समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

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‘मेंटल फॉग’ को नजरअंदाज न करें
सेमिनार में मेंटल फॉग को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. अंकिता ने बताया कि जब व्यक्ति लगातार मानसिक दबाव, स्क्रीन एक्सपोजर और बिना पर्याप्त आराम के काम करता है तो उसे चीजों पर ध्यान केंद्रित करने या कार्यों को व्यवस्थित करने में परेशानी महसूस हो सकती है। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय अपनी दिनचर्या में आराम, शारीरिक गतिविधि और मानसिक रिलैक्सेशन के लिए समय निकालना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी आराम की जरूरत है। समय पर ब्रेक, पर्याप्त नींद, व्यायाम और अपनों के साथ संवाद जैसी छोटी आदतें स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग के लिए डॉ. अंकिता चांदना ने श्री मनोज कांडपाल का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके सहयोग से यह महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित हो सका। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी स्वास्थ्य और जागरूकता से जुड़े ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोगों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा सके।

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