वन्यजीवों के लिए देवदूत बने डॉ. आशुतोष पन्त, टांडा जंगल में बनवाईं 20 जल हौदियां, अब लगाएंगे फलदार पेड़

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समाचार सच, हल्द्वानी (सुश्री नीरू भल्ला)। भीषण गर्मी में जब इंसान पानी की तलाश में परेशान हो जाता है, तब जंगलों में रहने वाले बेजुबान वन्यजीवों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। इन्हीं वन्यजीवों की प्यास बुझाने और उनके संरक्षण की सोच के साथ पर्यावरणविद् एवं पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. आशुतोष पन्त ने एक अनूठी पहल की है।

डॉ. पन्त ने हल्द्वानी-रुद्रपुर मार्ग के बीच स्थित टांडा जंगल में अपने पिता स्वर्गीय सुशील चंद्र पन्त की स्मृति में सीमेंट से निर्मित 20 मजबूत जल हौदियां स्थापित करवाई हैं। इन हौदियों में 3000 लीटर से अधिक पानी संग्रहित किया जा सकता है, जिससे गर्मियों में जंगली पशुओं को राहत मिलेगी।

डॉ. पन्त बताते हैं कि सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो देखने को मिले, जिनमें वन्यजीव पानी की तलाश में भटकते नजर आए। इन्हीं दृश्यों ने उनके मन को झकझोर दिया और उन्होंने कुछ करने का संकल्प लिया। पिता से मिले सेवा और संवेदनशीलता के संस्कारों ने इस सोच को एक मिशन का रूप दे दिया।

टांडा जंगल के रेंजर रूप नारायण गौतम और वन विभाग के सहयोग से यह कार्य पूरा किया गया। जमीन में स्थायी रूप से स्थापित की गई ये हौदियां आने वाले कई वर्षों तक वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती हैं।

अपने स्टूडियो इंटरव्यू में डॉ. आशुतोष पन्त ने समाज के अन्य लोगों से भी आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भी है।

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उन्होंने एक और महत्वपूर्ण चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि भोजन की तलाश में कई वन्यजीव जंगल छोड़कर सड़कों तक पहुंच जाते हैं, जहां वे सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने टांडा जंगल क्षेत्र में फलदार वृक्ष लगाने की योजना भी बनाई है। उनका मानना है कि यदि जंगलों में पर्याप्त फलदार पेड़ होंगे तो वन्यजीवों को भोजन के लिए बाहर नहीं आना पड़ेगा और उनका प्राकृतिक आवास भी सुरक्षित रहेगा।

डॉ. पन्त की यह पहल केवल जल संरक्षण या वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का भी संदेश देती है।

साथ ही उन्होंने इस सहयोग के लिए रेंजर रूप नारायण गौतम, डिप्टी रेंजर वीरेंद्र पड़ियार, राकेश पन्त, शशि वर्धन अधिकारी और वन कर्मियों का हृदय से आभार जताया है।

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