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वच के औषधीय फायदे से वाकिफ न होने के कारण नहीं जानते हैं इसके फायदे तो आइए जानते हैं वच के फायदे

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। हमारे आसपास कई तरह के औषधीय पौधे होते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव के कारण हम उसके लाभ नहीं उठा पाते। ऐसा ही एक पौधा वच भी है। इसे कई लोगों ने देखा होगा, लेकिन इसके फायदे से वाकिफ न होने के कारण कई लोग इसका इस्तेमाल नहीं करते। साथ ही यहां आप वच के उपयोग और संभावित वच के नुकसान भी जान पाएंगे।

वच के स्वास्थ्य लाभ
वच के उपयोग से कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। यही वजह है कि इसे सदियों से आयुर्वेदिक दवा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ध्यान दें कि वच किसी तरह की बीमारी का इलाज नहीं है, बल्कि उससे बचाव का एक तरीका हो सकता है। चलिए, जानते हैं कि वच के फायदे से किन शारीरिक समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।

सिरदर्द के लिए
अगर किसी को सिरदर्द की समस्या है, तो वो वच का उपयोग करके राहत पा सकता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में भी इस बात का जिक्र है। शोध में लिखा है कि वच को सिरदर्द के आयुर्वेदिक मेडिसीन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इसमें मौजूद एनाल्जेसिक प्रभाव सिरदर्द को कम कर सकता है। इसके अलावा, वच में एंटीकॉनवल्सेंट गतिविधि भी होती है। यह माइग्रेन से संबंधित सिरदर्द और मिर्गी के दौरे से बचाव कर सकता है।

पाचन और गैस के समस्या से राहत
वच के फायदे में गैस और पाचन से जुड़ी समस्याओं से राहत पाना भी शामिल है। इस संबंध में पब्लिश वैज्ञानिक शोध में बताया गया है कि इस पौधे की जुड़ पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को बेहतर कर सकती है। साथ ही वच के चूर्ण से भी पाचन क्रिया में सुधार हो सकता है। पाचन बेहतर होने के साथ ही इससे गैस की समस्या से भी राहत मिल सकती है।

डिटॉक्सीफिकेशन में
शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए भी वच उपयोगी साबित हो सकता है। दरअसल, वच में पाए जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव इंफ्लेमेशन के कारण बनने वाले साइटोकिन्स (एक तरह के प्रोटीन) को बाधित करके डिटॉक्सीफाइंग एंजाइम के रूप में काम करता है। यह एंजाइम शरीर से विषाक्त पदार्थों को बहार निकालने में सहायक हो सकता है।

सर्दी, खांसी और बुखार के लिए
सर्दी, खांसी और बुखार के इलाज के लिए भी वच का उपयोग किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च के अनुसार, वच के जड़ वाले भाग से बनाए गए पाउडर को सर्दी, खांसी और बुखार की आयुर्वेदिक दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। माना जाता है कि बुखार के लिए इसमें मौजूद एंटीपाएरेटिक गुण मदद कर सकता है। वहीं, सर्दी और खांसी कई बार वायरस की वजह से होता है। ऐसे में इसमें मौजूद एंटीवायरल गुण सर्दी और खांसी में सहायक हो सकता है।

घाव भरने के लिए
वच के फायदे में घाव भरना भी शामिल है। इस पौधे का इस्तेमाल आयुर्वेद में भी घाव भरने के लिए किया जाता रहा है। बताया जाता है कि इसमें वुंड हीलिंग प्रभाव होता है, जिसकी मदद से घाव को जल्दी भरने में मदद मिल सकती है। इसके पत्तों के अर्क को दिनभर में दो से तीन बार इस्तेमाल किया जाए, तो यह तेजी से घाव को भर सकता है।

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दस्त में
डायरिया यानी दस्त की स्थिति से छुटकारा पाने के लिए भी वच का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस संबंध में प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक, वच में एंटीडायरियल गुण होता है। इस प्रभाव की मदद से दस्त की समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

हैजा के लिए
हैजा जैसी समस्या से बचने में भी वच मददगार साबित हो सकता है। इस विषय को लेकर पब्लिश हुए अध्ययन के अनुसार, वच में एंटीबैक्टीरियल गुण होता है। यह गुण हैजा का कारण बनने वाले वाइब्रियो कॉलरा नामक बैक्टीरिया के प्रभाव को खत्म करने में मदद कर सकता है। इसी वजह से वच को हैजा के उपचार व जोखिम से बचाव में सहायक माना जाता है।

डिप्रेशन से राहत
डिप्रेशन यानी अवसाद की समस्या को कम करने के लिए भी वच के फायदे देखे जा सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिसर्च पेपर की मानें, तो वच में एंटीडिप्रेसेंट गतिविधि होती है। वच का यह प्रभाव डिप्रेशन के खिलाफ प्रभावी असर दिखा सकता है। इससे अवसाद के स्तर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

भूख बढ़ाने के लिए
वच के फायदे में भूख को बढ़ाना भी शामिल है। एक मेडिकल रिसर्च के अनुसार, वच को भूख न लगने की समस्या के लिए पारंपरिक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इससे भूख को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, भूख बढ़ाने के लिए वच में मौजूद कौन-सा तत्व व प्रभाव मदद करता है यह स्पष्ट नहीं है।

नपुंसकता
नपुंसकता की समस्या के उपचार में वच का उपयोग किया जा सकता है। एक मेडिकल रिसर्च में दिया है कि वच में एफ्राडिसियाक्स प्रभाव होता है। यह प्रभाव इरेक्टाइल डिसफंक्शन यानी नपुंसकता की समस्या को कम कर सकता है। इसके अलावा, यह कामोत्तेजक की तरह भी कार्य कर सकता है।

बोलने से संबंधित समस्याओं में
बोलने से संबंधित समस्या के लिए वच को फायदेमंद माना जाता है। इसके लिए वच राइजोम यानी इसके जड़ (कंद) के पेस्ट को आयुर्वेदिक दवाई के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। इससे स्पीच प्रॉब्लम यानी बोलने की समस्या में सुधार हो सकता है। साथ ही यह हकलाने की समस्या को भी कुछ हद तक कम कर सकता है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इसका कौन सा गुण इसमें सहायक है।

मस्तिष्क के लिए
वच के फायदे में मस्तिष्क स्वास्थ्य भी शामिल है। इस संबंध में पब्लिश एक वैज्ञानिक अध्ययन की मानें, तो यह तंत्रिका संबंधी विकार (दिमाग संबंधी परेशानी) को ठीक कर सकता है। साथ ही यह मेमोरी बूस्टिंग एक्टिविटी भी प्रदर्शित करता है, जिस वजह से इसे याददाश्त में सुधार और बढ़ावा देने के लिए उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा, वच में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव आसपास के शोर की वजह से होने वाले मेंटल स्ट्रेस को कम करने में भी लाभदायक हो सकता है।

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स्किन के लिए
त्वचा से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने में भी वच मदद कर सकता है। एक रिसर्च में इस बात का जिक्र है कि वच में पाया जाने वाला एंटीइंफ्लेमेटरी एजेंट स्किन डिजीज के इलाज में मदद कर सकता है। साथ ही इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं। ये गुण त्वचा को संक्रमण से बचाने में सहायक हो सकते हैं।

अनिद्रा के लिए
नींद न आने की समस्या को दूर करने के लिए भी वच का उपयोग किया जा सकता है। इस संबंध में प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, वच का उपयोग सालों से अनिद्रा का इलाज करने वाली आयुर्वेदिक दवाई के रूप में किया जाता रहा है। इसी वजह से माना जाता है कि इसका इस्तेमाल करने से अनिद्रा की परेशानी दूर हो सकती है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इसका कौन सा गुण व तत्व इसमें मदद करता है।

वच का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है, जिसके बारे में हम विस्तार से नीचे जानकारी दे रहे हैं। इसके इस्तेमाल के तरीके जानकर आप इसका लाभ उठा सकते हैं।

कैसे खाएं

  • वच को चूर्ण की तरह खाया जा सकता है। वच चूर्ण बाजार में आसानी से उपलब्ध है।
  • अगर वच की घास व पत्ते मिल जाएं, तो उसे चबाकर खा सकते हैं।
  • वच की घास को ऐसे ही कुछ देर के लिए मुंह में रख सकते हैं।
  • वच के पाउडर व चूर्ण को शहद में मिलकर खाया जा सकता है।
  • वच को पीसकर पेस्ट तैयार करके त्वचा पर लगा सकते हैं।

कब खाएं –
इसे खाने का समय स्पष्ट नहीं है, लेकिन बताया जाता है कि इसके चूर्ण को दिन में किसी भी समय शहद में मिलकर खा सकते हैं।

कितना खाएं

  • वच एक आयुर्वेदिक औषधि है, इसलिए इसके सेवन की मात्रा जानने के लिए विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होगा।
  • अगर आप इसका चूर्ण खरीद रहे हैं, तो उसमें इसके उपयोग की मात्रा लिखी होती है। फिर भी एक बार आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

वच के नुकसान भी हो सकते हैं, चलिए जानते हैं इसके बारे में।

  • वच के सेवन से पेट दर्द हो सकता है।
  • इसके उपयोग से कुछ लोगों को त्वचा पर रैशेज हो सकते हैं। ऐसे में अधिक संवेदनशील त्वचा वाले इसे पैच टेस्ट करने के बाद ही इस्तेमाल करें।
  • गर्भवती और स्तनपान करने वाली महिला को इसके सेवन से बचना चाहिए।
  • इससे एलर्जी की समस्या भी हो सकती है।

वच आयुर्वेदिक औषधि है, जो शरीर को कई फायदे पहुंचा सकती है। इसके कुछ नुकसान भी हैं, इसलिए दवा की मात्रा में ही इसका सेवन करें।

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