एक्सामिनो फोबिया परीक्षा का डर, भय से बचें

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-मनोचिकित्सक डा. नेहा शर्मा ने दिये छात्रों को टिप्स

समाचार सच, हल्द्वानी। प्री-बोर्ड की परीक्षा समाप्त होते ही बोर्ड परीक्षा का समय आ रहा है। मनोचिकित्सक डा. नेहा शर्मा का कहना है कि वे आजकल प्रतिदिन 5-6 ऐसे ही केसों जो कि हाईस्कूल व इंटर की बोर्ड परीक्षा की वजह से एक्जामिनो फोबिया से गसित बच्चों को परामर्श व मनोचिकित्सा दे रही हैं। डा. नेहा का कहना है कि परीक्षा के दौरान घबराना एक स्वाभाविक बात है। पर डर का इतना अधिक होना कि बच्चे के अन्दर पैनिक यानि घबराहट, सांस फूलना, फेल होने का डर बना रहना, आत्मविश्वास में कमी, बेहोश हो जाना, नींद न आना, कहीं पढ़ा हुआ परीक्षा में नहीं आया तो यह एक तरह की मनोवैज्ञानिक समस्या है जिसे एक्जामिनो फोबिया कहते हैं।

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डा. नेहा ने बताया कि इन पांच कारणों से इक्जामिनो फोबिया बच्चों पर हावी होता है।
-परीक्षा के लिए की गयी तैयारी में कमी।
-परीक्षा के प्रति दूसरों के विचारों से प्रभावित होना।
-परीक्षा के लिए तर्कहीन व गलत विचारों के मन में लाना।
-माता-पिता की अमीरांे का दबाव।
-परीक्षा में असफल होने का डर।
एक्सामिनो फोबिया को मनोवैज्ञानिक तरीके से कैसे दूर करें व पढ़ाई व परीक्षा को इंजाय करें।
-रिजल्ट की चिन्ता न करते हुए पढ़ाई करें और पूरा ज्ञान लेने की कोशिश करें।
-आत्मविश्वास व टाइमटेबल के अनुसार पढ़ें।
-हर घंटे के बाद 15-20 मिनट बाद ब्रेक लेना चाहिए व बार-बार गहरी सांस लें व छोड़े।
-कमजोर विषय पर अधिक ध्यान दें।
-देर रात तक पढ़ाई न करें और छह घंटे की नींद लें।
-बच्चों को मनोवैज्ञानिक तौर पर मजबूत बनाने के लिए मनोचिकित्सक से कांउसिंलिंग रिलेक्सेसन थेरेपी करवायें।
-प्री बोर्ड में कम नम्बर आने पर पैनिक व चिन्ता में न आयें व सकारात्मक सोच और अच्छे से पढ़ाई करे।

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