पूर्व मुख्यमंत्री हरदा बैठे एक घंटे के सांकेतिक मौन पर, कहा-जोशीमठ में ध्वस्तीकरण से पहले घोषित हो मुआवजा

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समाचार सच, देहरादून। बिना मुआवजा दिये और बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किये जोशीमठ में सरकार द्वारा ध्वस्तीकरण की घोषणा अत्यंत चिंताजनक लक्षण हैं यह राज्य की संवेदनहीनता परिलक्षित करती है। यह कहना है सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का। सरकार के इसी कदम का विरोध करने के लिए हरीश रावत आज देहरादून स्थित गांधी पार्क में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मूर्ति के समक्ष कांग्रेसजनों के साथ एक घंटे के सांकेतिक मौन उपवास पर बैठे

भगवान आदि गुरु शंकराचार्य की तपोभूमि ज्योतिर्मठ, नारायण बद्रीनाथ की शयन की भूमि ज्योतिर्मठ, देवभूमि के पूज्य देव स्थलों के केन्द्र ज्योतिर्मठ आज जगह-जगह भूस्खलन एवं भू-धसाव की वजह से टूट कर बिखर रहा है। ऐसे में राज्य सरकार से जिस गंभीरता और संवेदनशीलता की अपेक्षा थी वह कहीं दिखाई नहीं दे रही। सरकार जोशीमठ के स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित होने का दावा कर रही है परन्तु यह सत्य से परे है। मौन उपवास समाप्ति कर हरीश रावत ने कहा जोशीमठ चित्कार रहा है हमको पुकार रहा है परन्तु राज्य सरकार किंकतर्व्यविमूठ बनी हुयी है। रावत ने कहा कि लोगों के जीवन भर की कमाई उनके जान-माल, उनके मवेशी इत्यादि को संरक्षण देना राज्य सरकार का पहला कर्तव्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि राज्य के लिए चुनौतीपूर्ण समय पहली बार आया हो।

रावत ने कहा कि इससे पहले भी 2013 में राज्य के लोगों ने एकजुट होकर केदारनाथ दैवीय आपदा जैसी बड़ी चुनौती का सामना किया है। सरकार का ध्यान केवल स्थानीय लोगों को विस्थापित करना या पुर्नवासित करना नहीं होना चाहिए। बल्कि उनकी मनः स्थिति को समझते हुए उनका धैर्य बनाये रखने के लिए यह अत्यन्त जरूरी है कि उनकी जीवन भर की जमा पूंजी से जो मकान दुकान या व्यवसायिक केन्द्र उन्होंने स्थापित किये उसका उनकों उचित मुआवजा दिया जाए। मौन उपवास के दौरान उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष करन माहरा एवं हरीश रावत ने आपस में विचार विमर्श कर यह निर्णय लिया कि यदि कल शाम तक राज्य सरकार ध्वस्तीकरण से पहले उचित मुआवजे की घोषणा नहीं करती तो उस सूरत में मजबूरन उत्तराखंड कांग्रेस मुख्यमंत्री आवास घेराव करेगी।

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गोदियाल ने कहा कि जोशीमठ आज बहुत ही विकट परिस्थिति से गुजर रहा है जहां देखों त्राहिमाम है गोदियाल ने कहा कि एक तरफ उत्तराखंड कांग्रेस की पूरी लीडरशिप जोशीमठ पहुॅचकर स्थानीय जनता के इस कष्टमय एवं पीडादायी समय पर उन्हें ढांढस बंधा रही थी और दूसरी और संत्रियों और मंत्रियों की लंबी फौज होने के बावजूद भी सरकार का एक मंत्री भी वहाँ एक रात तक रुकने को तैयार नही। जिन परिवारों को शिफ्ट किये जाने की डुगडुगी राज्य सरकार पीट रही है उनकी और शासन प्रशासन पलट कर तक नहीं देख रहा है।

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जोशीमठ के होटलों को ध्वस्त किये जाने की घोषणा के विरोध में उत्तराखंड होटल एसोसिएशन की तरफ से संदीप साहनी, मौ0 इलियास, मनु कोचर, रजत कपूर, रमन चड्ढा, प्रणव गिलहोत्रा भी हरीश रावत के मौन उपवास को समर्थन देने पहुचें। उपवास की समाप्ति के बाद उत्तराखण्ड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एकत्रित कांग्रेसजनों को सम्बोधित किया।

मौन उपवास में उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत, संगठन उपाध्यक्ष मथुरा दत्त जोशी, पूरन रावत, महेन्द्र नेगी, डॉ0 प्रदीप जोशी, गरिमा माहरा दसौनी, शांति रावत, अमरजीत सिंह, शीशपाल, नजमा खान, आशा टम्टा, राजेश चमोली, उर्मिला थापा, गुलजार, राजेन्द्र भण्डारी, गोदावरी थापली, लखपत बुटोला, सोनिया आनंद रावत, सुशील राठी, सुजाता पॉल, आशा मनोरमा डोबरियाल, सुनिता प्रकाश, शिवानी थपलियाल मिश्रा, लक्ष्मी अग्रवाल, मनीष नागपाल, राजेन्द्र दानू, राकेश रावत, मोहन काला, दिनेश चौहान, सुनील जयसवाल, अनूप पासी, सुरेन्द्र रांगड, सत्या पोखरियाल, पुष्पा पंवार, रितेश क्षेत्री, शैलेन्द्र करगेती, गुल मोहम्मद, अनुराधा तिवारी, अजय रावत मौजूद रहे।

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