समाचार सच, देहरादून। आज देवभूमि उत्तराखंड में तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी श्रद्धा भाव के साथ मनाई गई। श्री पृथ्वीनाथ महादेव जी मंदिर देहरादून में प्रातः 9रू00 बजे श्री तुलसा मैया का भव्य कार्यक्रम में पूजन किया गया। श्री पृथ्वीनाथ महादेव जी मंदिर सेवा दल के संजय कुमार गर्ग ने कहा की
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रीहरि चतुर्मास की निद्रा से जागते हैं, इसीलिए इस एकादशी को देवउठनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन से ही हिन्दू धर्म में शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु के स्वरूप शालीग्राम का देवी तुलसी से विवाह होने की परंपरा भी है। माना जाता है कि जो भक्त देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का अनुष्ठान करता है उसे कन्यादान के बराबर पुण्य मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता तुलसी ने भगवान विष्णु को नाराज होकर श्राम दे दिया था कि तुम काला पत्थर बन जाओगे। इसी श्राप की मुक्ति के लिए भगवान ने शालीग्राम पत्थर के रूप में अवतार लिया और तुलसी से विवाह कर लिया। वहीं तुलसी को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। हालांकि कई लोग तुलसी विवाह एकादशी को करते है तो कहीं द्वादशी के दिन तुलसी विवाह होता है। ऐसे में एकादशी और द्वादशी दोनों तिथियों का समय तुलसी विवाह के लिए तय किया गया है।
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