संघ की पाठशाला से राज्यसभा की दहलीज तक: कौन हैं दिनेश आर्य, जिन्हें भाजपा ने उत्तराखंड से बनाया उम्मीदवार?

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समाचार सच, देहरादून डेस्क।
उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से संगठन के स्तर पर सक्रिय दिनेश आर्य अब राष्ट्रीय राजनीति के अगले पड़ाव की ओर बढ़ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें उत्तराखंड से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया है। नैनीताल की राजनीति और भाजपा संगठन में वर्षों तक सक्रिय रहे आर्य के राजनीतिक सफर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विद्यार्थी परिषद, भाजपा संगठन, अनुसूचित मोर्चा और सरकार में दायित्व—कई महत्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं।
राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने से पहले तक दिनेश आर्य उत्तराखंड सरकार में राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। दिसंबर 2023 में उन्हें यह दायित्व दिया गया था और उन्हें

राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त है।
-संघ से शुरू हुआ जुड़ाव, विद्यार्थी परिषद से राजनीति में कदम
-दिनेश आर्य का संगठनात्मक सफर काफी पुराना बताया जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रशिक्षण वर्गों में हिस्सा लिया और इसके बाद 1985 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर नैनीताल में सक्रिय राजनीति की शुरुआत की।
-1986 में उन्हें विद्यार्थी परिषद का नैनीताल जिला संयोजक बनाया गया। करीब दो वर्ष तक उन्होंने इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया। विद्यार्थी परिषद के बाद उनका सफर भाजपा संगठन की ओर बढ़ा और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा ने लगातार विस्तार लिया।

युवा मोर्चा से अनुसूचित मोर्चा तक संभाली जिम्मेदारियां
-भाजपा से जुड़ने के बाद दिनेश आर्य को संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां मिलती रहीं। वह 1988 से 1991 तक नैनीताल जिला युवा मोर्चा के मंत्री रहे। इसके बाद 1992 से 1995 तक उन्होंने भाजपा अनुसूचित मोर्चा के नैनीताल जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
इसके बाद उन्हें प्रदेश संगठन में भी जिम्मेदारियां मिलीं। वह 1996 से 1998 तक युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष और 2001 से 2002 तक अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश महामंत्री रहे। इसके बाद प्रदेश कार्यकारिणी में भी सक्रिय रहे।
2007 में नैनीताल भाजपा की कमान
संगठन में लंबी सक्रियता के बाद दिनेश आर्य को 2007 से 2010 तक भाजपा नैनीताल जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। जिला संगठन की कमान संभालने के बाद भी उनका राजनीतिक केंद्र नैनीताल और कुमाऊं क्षेत्र ही बना रहा।
बाद के वर्षों में भी पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता जारी रही। 2017 से 2021 तक भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव और पंजाब प्रभारी के रूप में उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाली।

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धामी के जनसंपर्क की जिम्मेदारी भी संभाली
दिनेश आर्य के राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2021 रहा, जब उन्हें पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क से जुड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद धामी सरकार के कार्यकाल में उन्हें सरकारी दायित्व भी मिला।
दिसंबर 2023 में उन्हें उत्तराखंड राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद पेयजल योजनाओं की समीक्षा, जल जीवन मिशन समेत विभिन्न योजनाओं से जुड़े कार्यों को लेकर उनकी सक्रियता सामने आती रही है।

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नैनीताल विधानसभा से भी टिकट के दावेदार रहे
राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने से पहले दिनेश आर्य की सक्रियता नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में भी चर्चा में रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा से नैनीताल सीट के लिए दावेदारी की थी। इस बार भी वह क्षेत्र में राजनीतिक रूप से सक्रिय थे। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, 2026 में भी नैनीताल क्षेत्र में उनकी संगठनात्मक गतिविधियां जारी थीं।
अब भाजपा द्वारा राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद उनके राजनीतिक सफर की दिशा विधानसभा राजनीति से आगे बढ़कर संसद की ओर जाती दिखाई दे रही है।

दिनेश आर्य की राजनीति का एक बड़ा हिस्सा चुनावी राजनीति से ज्यादा संगठनात्मक जिम्मेदारियों के इर्द-गिर्द रहा है। विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक से लेकर भाजपा के विभिन्न मोर्चों की जिम्मेदारी, नैनीताल जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय स्तर पर अनुसूचित जाति मोर्चे की जिम्मेदारी और फिर सरकार में दर्जाधारी दायित्व तक उन्होंने संगठन के अलग-अलग स्तरों पर काम किया है।

अब भाजपा ने उन्हें राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर एक नई जिम्मेदारी के लिए मैदान में उतारा है। संघ-विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ यह लंबा संगठनात्मक सफर अब संसद के उच्च सदन तक पहुंचने की दिशा में है।
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना है। भाजपा की ओर से उम्मीदवार घोषित होने के बाद अब दिनेश आर्य के राजनीतिक सफर का अगला अध्याय राज्यसभा चुनाव के साथ जुड़ गया है।

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