पाबंदियों के बीच मनाया गया गंगा दशहरा पर्व

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समाचार सच, देहरादून/हल्द्वानी। सरकारी पाबंदियों के बीच गंगा दशहरा और गायत्री जयंती का पर्व मनाया गया। इस मौके पर सरकारी पाबंदी के चलते लोग गंगा स्नान के लिए हर की पैड़ी या अन्य गंगा घाटों पर सामूहिक रूप से नहीं जा पा रहे हैं। इसलिए गंगा स्नान को लेकर भीड़ नजर नहीं आ रही। मंदिरों के कपाट भी बंद है। इसलिए लोग घरों में ही पूजा-पाठ कर ले रहे हैं। सामान्य दिनों में इस मौके पर हरिद्वार में लाखों की भीड़ जमा होती थी और सुबह के प्रथम पहर में ही 5 से 10 लाख लोग गंगा स्नान कर चुके होते थे। हस्त नक्षत्र और सिद्धि योग में गंगा दशहरा पर हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान करने वालों की भारी भीड़ जमा होती थी, लेकिन रोक के चलते पुलिस ने वहां पर भारी सुरक्षा प्रबंध किए हुए हैं जिससे इक्का-दुक्का लोगों को छोड़कर हर की पैड़ी पर कोई नहीं पहुंच पा रहा। हर साल इस मौके पर हाईवे और पूरे शहर में जगह-जगह श्रद्धालुओं छबील लगाकर शरबत और प्रसाद का वितरण करते थे, जो इस बार नहीं हो पा रहा है।

मान्यता है कि गंगा दशहरे पर गंगा स्नान करने से मनुष्य के 10 प्रकार के पापों का नाश होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गंगा दशहरा दस शुभ वैदिक गणनाओं के लिए मनाया जाता है। गंगा दशहरे में विचारों, भाषण और कार्यों से जुड़े दस प्रकार के पापों को धोने की गंगा की क्षमता है। दस वैदिक गणनाओं में ज्येष्ठ माह, शुक्लपक्ष, दसवां दिन, गुरुवार, हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग, आनंद योग और कन्या राशि में चंद्रमा और वृषभ राशि में सूर्य शामिल हैं। मान्यता ऐसी है कि इस दिन मां गंगा की पूजा करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इसी दिन गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। हिंदू मान्यता के अनुसार गंगा को देवों की नदी कहा जाता है। गंगा दशहरे वाले दिन गंगा माता की पूजा अर्चना होती है। साथ ही काशी, हरिद्वार और प्रयागराज के घाटों पर लोग गंगा माता के पवित्र जल में स्नान कर भक्त अपने पापों का अंत करते हैं। मगर इस बार अनलाक-1 की पाबंदियों के चलते ऐसा करना संभव नहीं होगा।

डॉक्टर आचार्य सुशांत राज का कहना हैं की गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। ज्येष्ठ शुक्ला दशमी को दशहरा कहते हैं। इसमें स्नान, दान, रूपात्मक व्रत होता है। स्कन्दपुराण में लिखा हुआ है कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी संवत्सरमुखी मानी गई है इसमें स्नान और दान तो विशेष करके करें। किसी भी नदी पर जाकर अर्घ्य (पूजादिक) एवं तिलोदक (तीर्थ प्राप्ति निमित्तक तर्पण) अवश्य करें। ऐसा करने वाला महापातकों के बराबर के दस पापों से छूट जाता है। यदि ज्येष्ठ शुक्ला दशमी के दिन मंगलवार रहता हो व हस्त नक्षत्र युता तिथि हो यह सब पापों के हरने वाली होती है। वराह पुराण में लिखा हुआ है कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी बुधवारी में हस्त नक्षत्र में श्रेष्ठ नदी स्वर्ग से अवतीर्ण हुई थी वह दस पापों को नष्ट करती है। इस कारण उस तिथि को दशहरा कहते हैं। ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, बुधवार, हस्त नक्षत्र, गर, आनंद, व्यतिपात, कन्या का चंद्र, वृषभ के सूर्य इन दस योगों में मनुष्य स्नान करके सब पापों से छूट जाता है। भविष्य पुराण में लिखा हुआ है कि, जो मनुष्य इस दशहरा के दिन गंगा के पानी में खड़ा होकर दस बार इस स्तोत्र को पढ़ता है चाहे वो दरिद्र हो, चाहे असमर्थ हो वह भी प्रयत्नपूर्वक गंगा की पूजा कर उस फल को पाता है। यह दशहरा के दिन स्नान करने की विधि पूरी हुई। स्कंद पुराण का कहा हुआ दशहरा नाम का गंगा स्तोत्र और उसके पढ़ने की विधि – सब अवयवों से सुंदर तीन नेत्रों वाली चतुर्भुजी जिसके कि, चारों भुज, रत्नकुंभ, श्वेतकमल, वरद और अभय से सुशोभित हैं, सफेद वस्त्र पहने हुई है। मुक्ता मणियों से विभूषित है, सौम्य है, अयुत चंद्रमाओं की प्रभा के सम सुख वाली है जिस पर चामर डुलाए जा रहे हैं, वाल श्वेत छत्र से भली-भाँति शोभित है, अच्छी तरह प्रसन्न है, वर के देने वाली है, निरंतर करुणार्द्रचित्त है, भूपृष्ठ को अमृत से प्लावित कर रही है, दिव्य गंध लगाए हुए है, त्रिलोकी से पूजित है, सब देवों से अधिष्ठित है, दिव्य रत्नों से विभूषित है, दिव्य ही माल्य और अनुलेपन है, ऐसी गंगा के पानी में ध्यान करके भक्तिपूर्व मंत्र से अर्चना करें। ‘ऊँ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा’ यह गंगाजी का मंत्र है। इसका अर्थ है कि, हे भगवति गंगे! मुझे बार-बार मिल, पवित्र कर, पवित्र कर, इससे गंगाजी के लिए पंचोपचार और पुष्पांजलि समर्पण करें। इस प्रकार गंगा का ध्यान और पूजन करके गंगा के पानी में खड़े होकर ऊँ अद्य इत्यादि से संकल्प करें कि, ऐसे-ऐसे समय ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से लेकर दशमी तक रोज-रोज एक बढ़ाते हुए सब पापों को नष्ट करने के लिए गंगा स्तोत्र का जप करूँगा। पीछे स्तोत्र पढ़ना चाहिए। ईश्वर बोले कि, आनंदरूपिणी आनंद के देने वाली गंगा के लिए बारंबार नमस्कार है।

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