समाचार सच, हल्द्वानी। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी ने उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। कहा है कि सरकार को कोविड-19 से लड़ने के लिए व्यवहारिक और प्रभावी फैसले लेने की जरूरत है।
प्रेस को जारी एक बयान में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव ने कहा है कि अभी तक सरकार के कोरोना से लड़ने के तरीके को देखा जाए तो उत्तराखंड सरकार मात्र पड़ोसी राज्यों द्वारा उठाये गये कदमों की ही कॉपी-पेस्ट करने में लगी हुई है। सरकार स्वयं के विवेक से फैसले लेने में असमर्थ दिख रही है। सबसे महत्वपूर्ण है कि इस महामारी से लड़ने का एक मुख्य हथियार अधिक से अधिक जांच करना है, जितनी अधिक जांच होगी, उतने ही अधिक संक्रमितों का पता चलेगा और सरकार उनका इलाज करा पायेगी।
उन्होंने कहा कि यह भी सच है कि जिस अव्यवहारिक लॉक डाउन ने देश के गरीब-मजदूरों को सड़क पर ला दिया और देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी, उसी लॉक डाउन का वास्तविक उपयोग इस महामारी से लड़ने में संसाधनों को बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए था, जिसमें उत्तराखंड सरकार चूक गई।
उनका कहना कहना था कि इस महामारी की जब शुरूआत हुई, तब प्रदेश में दो ही टेस्टिंग लैब हल्द्वानी व देहरादून को शुरू किया गया और आज लॉक डाउन के ढ़ाई माह बीत जाने के बाद भी गढ़वाल मंडल में मात्र 4 और पूरे कुमाउं मंडल, जिसकी आबादी लगभग 45 लाख है, मात्र एक टेस्टिंग लैब होने के चलते सैपलों का बैकलॉग बढ़ता जा रहा है।
जोशी ने हैरानी जताते हुए कहा है कि सैंपलों के बढ़ते बैकलॉग को छिपाने के लिए सरकार ने सरकारी बुलेटिन में बैकलॉग की संख्या बताना तक बंद कर दिया। जबकि सरकार को इस महामारी के दौर में प्रत्येक जिला मुख्यालय में टेस्टिंग लैब संचालित कर देने चाहिए थे। उन्होंने मांग की है कि सरकार प्रत्येक जिला मुख्यालय में कोरोना टेस्टिंग लैब स्थापित करे। साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतघरों और स्कूलों में चलने वाले क्वारंटाइन सेंटरों की बदहाली भी चिंता जताते हुए सरकार से इन्हें संचालित करने के लिए शीघ्र आर्थिक सहायता मुहैया कराने की मांग की है।

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