15 जुलाई से 30 सितंबर तक चलेगा विशेष अभियान, पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पंत करेंगे हजारों लोगों को मुफ्त फलदार पौधों का वितरण।

समाचार सच, हल्द्वानी। उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बार फिर बड़ा जनअभियान शुरू होने जा रहा है। हरेला पर्व (15 जुलाई) से 30 सितंबर 2026 तक प्रदेश में व्यापक स्तर पर निःशुल्क वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को उनकी निजी भूमि पर लगाने के लिए फलदार एवं उपयोगी पौधे पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस अभियान का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ पर्यावरणविद् एवं पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत ने बताया कि वर्ष 1988 से लगातार चल रहे इस जनआंदोलन के तहत अब तक 4 लाख 65 हजार से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। इस वर्ष लक्ष्य को बढ़ाते हुए 35 हजार से अधिक पौधे लगाने की योजना बनाई गई है, जिससे अभियान 5 लाख पौधों के ऐतिहासिक आंकड़े तक पहुंच सके।
डॉ. पंत ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आम, अमरूद, कटहल, सहजन, आंवला, अनार, माल्टा सहित कई फलदार पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं शहरों में सीमित स्थान को ध्यान में रखते हुए करौंदा, नींबू और शरीफा जैसे पौधों का भी निःशुल्क वितरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान की केवल एक ही शर्त हैकृपौधा केवल लगाया ही नहीं जाए, बल्कि उसकी जिम्मेदारी लेकर उसे पेड़ बनने तक संरक्षित भी किया जाए।
उन्होंने बताया कि यह अभियान उनके पिता स्वर्गीय सुशील चंद्र पंत की प्रेरणा से शुरू हुआ था। पिछले 38 वर्षों से यह कार्य पूरी तरह व्यक्तिगत संसाधनों से संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज तक इस अभियान के लिए किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार से आर्थिक सहायता नहीं ली गई है। उनका उद्देश्य केवल धरती का ऋण चुकाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली बढ़ाने का है।
डॉ. पंत ने अपने सहयोगियों, मित्रों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना यह अभियान संभव नहीं हो सकता था। उन्होंने ग्राम प्रधानों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों से इस जनअभियान से जुड़ने का आह्वान किया है।
यदि कोई ग्राम प्रधान, संस्था या पर्यावरण प्रेमी अपने क्षेत्र में निःशुल्क पौध वितरण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करना चाहता है, तो वह अपने क्षेत्र की विस्तृत जानकारी व्हाट्सएप नंबर 9412958988 पर भेज सकता है। इसके बाद डॉ. पंत स्वयं संपर्क कर कार्यक्रम की रूपरेखा तय करेंगे। उन्होंने बताया कि पौधों के सुरक्षित परिवहन को देखते हुए नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ रही ग्लोबल वार्मिंग, गिरता भूजल स्तर, बढ़ता प्रदूषण और अंधाधुंध कटते जंगल आने वाले समय के लिए गंभीर चेतावनी हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अधिक से अधिक पेड़ लगाए और उनकी देखभाल करे। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस हरेला पर्व पर केवल पौधा लगाने का संकल्प ही नहीं, बल्कि उसे पेड़ बनाने का भी संकल्प लें।



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