समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। कल यानी 11 मई को वैशाख अमावस्या है। हिंदू धर्म में वैशाख अमावस्या का बहुत अधिक महत्व होता है। इस अमावस्या को भौमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन स्नान- दान आदि का बहुत अधिक महत्व होता है। कई लोग पितृ और कालसर्प दोष से परेशान रहते हैं। वैशाख अमावस्या के दिन कुछ उपाय करने से इन दोषों से मुक्ति मिल सकती है। आइए जानते हैं वैशाख अमावस्या के दिन पितृ और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए क्या करना चाहिए।
कालसर्प दोष
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुंडली में जब राहु और केतु के मध्य सभी ग्रह आ जाएं तो कालसर्प दोष का निर्माण हो जाता है। कालसर्प दोष की वजह से व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस दोष से मुक्ति के लिए अमावस्या के पावन दिन विधि- विधान से भगवान शिव की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। इस दिन दूध, गंगा जल, इत्यादि से भोलेनाथ का अभिषेक करें। भोलेनाथ को भोग भी लगाएं और उनकी आरती करें। भगवान शिव की पूजा- अर्चना करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिल सकती है।
पितृ दोष
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार कुंडली में दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें और दसवें भाव में सूर्य राहु या सूर्य शनि की युति बनने पर पितृ दोष लगता है। सूर्य के तुला राशि में रहने पर या राहु या शनि के साथ युति होने पर इस दोष का प्रभाव बढ़ जाता है। इसके साथ ही लग्नेश का छठे, आठवें, बारहवें भाव में होने और लग्न में राहु के होने पर भी पितृ दोष लगता है। पितृ दोष की वजह से व्यक्ति का जीवन परेशानियों से भर जाता है। इस दोष से मुक्ति के लिए वैशाख अमावस्या के दिन पितर संबंधित कार्य करने चाहिए। पितरों का स्मरण कर पिंड दान करना चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगें।
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