जैन मुनिश्री शुद्धात्म सागर ने बदला विचार, संन्यास छोड़, अब करेंगे शादी और पहनेंगे कपड़े

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समाचार सच, दिल्ली (एजेन्सी)। मध्य प्रदेश के दमोह जिला स्थित बेलाजी जैन तीर्थ क्षेत्र में रहकर चातुर्मास व्रत कर रहे मुनिश्री शुद्धात्म सागर ने अब 25 साल का संन्यास छोड़कर गृहस्थी बसाने की इच्छा की है। इस बारे में शुद्धात्म सागर ने खुलकर घोषणा भी कर दी है। उनके अचानक अपने मन को बदल लेने से हर कोई हैरान है और भक्त भी आश्चर्यचकित है। इधर इस मामले में विवाद भी शुरू हो गया है। आपको बता दें कि वह दो बार दीक्षा ले चुके हैं और पिछले 25 साल से बिना कपड़े के हैं। अब उन्होंने अपनी महिला मित्र प्रज्ञा दीदी से विवाह करके खुद आम लोगों की तरह गृहस्थ जीवन बिताने की इच्छा जताई हैं।

बताया जा रहा है कि 24 अगस्त को शाम सात बजे वह पटेरा मार्ग स्थित आश्रम से निकले और सीधे हिंडोरिया थाने पहुंचे। उन्होंने थाने में ही वस्त्र पहनकर 25 साल का संन्यास छोड़ दिया। उनके पहुंचने के कुछ घंटे बाद उनकी महिला मित्र भी थाने पहुची। थाने में मुनिश्री शुद्धात्म सागर और महिला मित्र ने बेलाजी जैन तीर्थ क्षेत्र प्रबंधन पर मारपीट और प्रताड़ित करने के आरोप भी लगाए। हालांकि इसकी रिपोर्ट दर्ज कराने से इनकार कर दिया।

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जानकारी के अनुसार मुनिश्री पिछली 22 जुलाई को आश्रम आए थे। यहां पर उनसे 8 दिन पहले आगरा से आईं महिला मित्र प्रज्ञा दीदी से बातचीत होने लगी। दोनों के इस तरह बातचीत करने पर आश्रम के आचार्यश्री सिद्धांत सागर महाराज ने नाराजगी जताई और दोनों को बाहर जाने को कह दिया। इधर इस मामले में थाना प्रभारी संधीर चौधरी ने बताया कि थाने में मुनिश्री शुद्धात्म सागर ने तीर्थ क्षेत्र प्रबंधन पर मारपीट करने, महिला मित्र को खाना न देने के आरोप लगाते हुए पहले लिखित शिकायत दर्ज करायी, लेकिन बाद में शिकायत वापस ले ली। रात 11 बजे थाने में महिला मित्र प्रज्ञा दीदी भी पहुंचीं और तीर्थ क्षेत्र प्रबंधन पर मोबाइल छीनने और मंदिर से बाहर करने का आरोप लगाया।

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पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रज्ञा दीदी ने कहा कि हम मोबाइल पर सिर्फ बात करते थे। कुछ भी गलत संबंध नहीं बनाए। यहां भेदभाव हो रहा है। हम एक टाइम भोजन करते हैं, हमसे कहा जाता था कि पहले महाराजजी भोजन करेंगे, बाद में खाना मिलेगा। मंगलवार को खाना नहीं दिया। बीच में बड़े महाराज आए और यहां से निकलने के लिए कह दिया। हमारा बैग, पैसा और भगवान का सिंहासन भी ले लिए।

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उधर, मुनिश्री शुद्धात्म सागर ने कहा कि वह किसी का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन मुझे बदनाम किया जा रहा है। वह एक माह पहले जुलाई में ही आश्रम आये थे। हमें यहां पर गलत ढंग से देखा जा रहा है, इसलिए अब वह गृहस्थ जीवन ही अपनायेंगे। उनका कहना था कि प्रज्ञा दीदी के साथ गृहस्थ जीवन स्वीकार कर रहा हूं।

इधर आश्रम में और भक्तों में चर्चा थी कि बुधवार को वे दोनों लोग दमोह के जिला न्यायालय में कोर्ट मैरिज करने जाने वाले हैं, फिलहाल उन्होंने ऐसा नहीं किया। इससे पहले गुजरात के जूनागढ़ आश्रम के मुनि मुदित सागर उर्फ हुकुमचंद जैन भी सांसारिक जीवन में लौट चुके हैं। उन्होंने खान-पान से लेकर पूरी दिनचर्या आम लोगों की तरह अपना ली है।

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