हल्द्वानी में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस संत महात्माओं ने दिया धर्म, भक्ति और मानव कल्याण का संदेश, समाज के विशिष्ट लोगों का हुआ सम्मान

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श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सागर, ध्रुव चरित्र और वाराह अवतार की महिमा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

समाचार सच, हल्द्वानी। रामपुर रोड स्थित श्री दत्तात्रेय आश्रम में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान की दिव्य लीलाओं का रसपान किया और धर्ममय वातावरण में आत्मिक शांति का अनुभव किया।

श्री गिरिजा देवी सनातन सेवा समिति, हल्द्वानी के तत्वावधान में आयोजित कथा में कथा व्यास डॉ. नवीन चन्द्र जोशी ने श्रीमद्भागवत महापुराण के गूढ़ प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए सृष्टि की उत्पत्ति का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी ने मनु और शतरूपा की उत्पत्ति कर मानव सृष्टि का आरंभ किया। देवहूति, आकूति और प्रसूति सहित प्रियव्रत एवं उत्तानपाद के माध्यम से सृष्टि का विस्तार हुआ।

कथा के दौरान भगवान के वाराह अवतार की महिमा का वर्णन करते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि प्रत्येक जीव के भीतर परमात्मा का अंश विद्यमान है। जब अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब भगवान विभिन्न अवतारों के माध्यम से धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान वाराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को विनाश से बचाया और सृष्टि की रक्षा की।

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श्रद्धालुओं को भक्ति की शक्ति का संदेश देते हुए कथा व्यास ने बालक ध्रुव के अद्भुत चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और अटूट भक्ति के आगे स्वयं भगवान भी भक्त के अधीन हो जाते हैं। बालक ध्रुव की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन दिए और ध्रुव पद प्रदान कर अमर कर दिया। वहीं भगवान पृथु के अवतार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोककल्याण और पृथ्वी की रक्षा के लिए भगवान समय-समय पर अवतार धारण करते हैं।

इस अवसर पर श्री गिरिजा देवी सनातन सेवा समिति द्वारा भव्य सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया। समिति के संरक्षक प्रोफेसर डॉ. एस.डी. तिवारी एवं श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी परेश यति महाराज ने समाज, शिक्षा, चिकित्सा और ज्योतिष के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी, वरिष्ठ चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ. गिरीश चन्द्र पाटनी, समाजसेवी आनंद सिंह भाकुनी तथा शिक्षिका एवं समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय श्रीमती अनुराधा पाण्डेय को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

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स्थानीय संयोजक मोहन पाठक ने कहा कि समिति द्वारा प्रतिवर्ष समाज में उत्कृष्ट और प्रेरणादायी कार्य करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित कर उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

कार्यक्रम में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी परेश यति महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि मानव जीवन का वास्तविक कल्याण संतों के सान्निध्य और सत्संग से ही संभव है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में संतों की महिमा का विस्तृत वर्णन किया गया है और उनके मार्गदर्शन से ही जीवन को सही दिशा मिलती है।

यज्ञ एवं पूजन कार्य में आचार्य प्रकाश चन्द्र जोशी, आचार्य प्रमोद चन्द्र जोशी, पं. हेम चन्द्र जोशी, आचार्य गोविन्द बल्लभ जोशी और दयाकृष्ण पाण्डेय सहित अनेक विद्वान आचार्यों ने सहभागिता निभाई। वहीं पान सिंह बिष्ट, राधिका जोशी, चन्द्रशेखर भट्ट सहित अनेक श्रद्धालुओं ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

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