नर्सिंग भर्ती विवाद ने पकड़ा तूल: स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पर छात्रा के आत्महत्या प्रयास पर महिला कांग्रेस ने मचाया बवाल, कई कार्यकर्ता हिरासत में

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समाचार सच, देहरादून। उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती विवाद अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। बुधवार को नर्सिंग अभ्यर्थी द्वारा आत्महत्या के प्रयास की खबर सामने आने के बाद महिला कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के आवास का घेराव कर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पुलिस ने हालात बिगड़ने की आशंका के चलते महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार नर्सिंग अभ्यर्थियों की वर्षों पुरानी मांगों की अनदेखी कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में पहले सीनियरिटी के आधार पर नियुक्ति का निर्णय लिया गया था, लेकिन बाद में नियम बदलकर भर्ती परीक्षा को आधार बना दिया गया, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।

इसी बीच आंदोलन में शामिल एक महिला नर्सिंग अभ्यर्थी के आत्महत्या के प्रयास की सूचना से अभ्यर्थियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया। अभ्यर्थी को गंभीर हालत में दून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है।

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घटना के बाद महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता स्वास्थ्य मंत्री के आवास पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भर्ती प्रक्रिया में तत्काल हस्तक्षेप और अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की मांग की। पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद मौके पर तीखी नोकझोंक और हंगामे की स्थिति बन गई।

महिला कांग्रेस का आरोप है कि सरकार भर्ती नियमों में बार-बार बदलाव कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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नर्सिंग भर्ती को लेकर लंबे समय से दो अलग-अलग मांगें सामने हैं। अभ्यर्थियों का एक वर्ग सीनियरिटी के आधार पर नियुक्ति चाहता है। उनका तर्क है कि वर्ष 2013 तक के अभ्यर्थियों को इसी आधार पर लाभ दिया गया था, इसलिए बाद के अभ्यर्थियों के साथ अलग नियम लागू करना उचित नहीं है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि भर्ती परीक्षा के माध्यम से चयन अधिक पारदर्शी और योग्यता आधारित व्यवस्था है।

फिलहाल आत्महत्या के प्रयास की घटना के बाद यह विवाद और गंभीर हो गया है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है।

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