खटीमा गोलीकांड की बरसी पर छलका आंदोलनकारियों का दर्द, शहीदों को श्रद्धांजलि देकर बोले- गैरसैंण राजधानी का सपना अब भी अधूरा

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राज्य आंदोलनकारी मंच ने उठाए सवाल—पलायन नहीं थमा, पहाड़ों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति पर चिंता

समाचार सच, हल्द्वानी।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों की कुर्बानी को याद करते हुए राज्य आंदोलनकारी मंच ने खटीमा गोलीकांड की बरसी पर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। तिकोनिया स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आंदोलनकारियों ने शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता जताई।

जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में आंदोलनकारियों ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन जिन उम्मीदों और सपनों के साथ हुआ था, उनमें से कई आज भी अधूरे हैं। वक्ताओं ने विशेष रूप से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि शहीदों और आंदोलनकारियों का यह सपना अभी तक साकार नहीं हो पाया है।

राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी पहाड़ों से पलायन लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण प्रदेश का युवा अपने भविष्य की तलाश में दूसरे राज्यों और शहरों की ओर जाने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि जिन राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान से उत्तराखंड अस्तित्व में आया, उनके परिवारों को भी आज कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

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उन्होंने कहा कि पहाड़ी जिलों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता आज भी बनी हुई है। गंभीर बीमारी की स्थिति में पहाड़ के लोगों को इलाज के लिए हल्द्वानी जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में राज्य आंदोलन के मूल उद्देश्यों और शहीदों के सपनों के अनुरूप पहाड़ों के विकास पर गंभीरता से काम किए जाने की जरूरत है।

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कार्यक्रम में आंदोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक अलग राज्य के रूप में स्थापित हो जाना ही आंदोलन की पूर्ण सफलता नहीं है, बल्कि शहीदों के सपनों के अनुरूप रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और पलायन पर रोक ही वास्तविक विकास का आधार होना चाहिए।

इस अवसर पर राजेंद्र सिंह बिष्ट, राजेंद्र नेगी, ज्योत्सना पांडे, डॉ. बालम सिंह बिष्ट, लीला बगड़वाल, चंपा तिवारी, देवकी घुघत्याल, भवानी देवी, तारा तिवारी, खष्टी बगड़वाल, मालती, बसंती तिवारी, अरुण चंद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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