समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। आप किसी बस या ट्रेन में 2 घंटे का भी यदि सफर करते हो तो अच्छी सीट पर बैठना पसंद करते हो या नहीं? इसी तरह सोने से पहले यह तय कर लें कि बिस्तर आरामदायक और साफ-सुधरा होना चाहिए, क्योंकि हमें उस पर कम से कम 7 घंटे बिताना है। अप जानते हैं तरीका।
बाईं करवट लेकर सोएं – कहते हैं कि सीधा सोए योगी, डामा (बांया) सोए निरोगी, जीमना (दांया) सोए रोगी। हमें शवासन में सोना चाहिए इससे आराम मिलता है कभी करवट भी लेना होतो बाईं करवट लें। बहुत आवश्यक हो तभी दाईं करवट लें।
बदलते रहें स्थिति – शरीर विज्ञान कहता है कि चित्त सोने से रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचता है जबकि औंधा सोने से आंखों को नुकसान होता है। हमारे हिसाब से समय समय पर स्थिति बदलते रहना चाहिए यदि आप किस्तों में सो रहे हैं तो।
सोने की दिशा – आप सोने जा रहे हैं तो यह भी तय करें कि आपके पैर किस दिशा में हैं। दक्षिण और पूर्व में कभी पैर न रखें। पूर्व दिशा में सिर रखकर सोने से ज्ञान में बढ़ोतरी होती है। दक्षिण में सिर रखकर सोने से शांति, सेहत और समृद्धि मिलती है।
दरवाजे की ओर न रखें पैर – पैरों को दरवाजे की दिशा में भी न रखें। इससे सेहत और समृद्धि का नुकसान होता है।
हाथों को न रखें छाती पर – सोते समय यह ध्यान रखें कि छाती पर हाथ ना हो और छत पर मियाल ना हो। मियाल यानी की आड़ा लगा पिलर जो छत की सपोट के लिए लगाते हैं।
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