मलेरिया प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होने वाली संक्रामक बीमारी है, ऐसे 5 हर्बल चूर्ण, बस 1 चम्मच से कंट्रोल रहेगा

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। हर साल 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस मनाया जाता है। दरअसल, इस दिन ही इस बात का पता लगा था कि मच्छर मलेरिया का कारण बनने वाले परजीवी को फैलाने का काम करता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य मलेरिया के प्रति जागरूकता को फैलाने और इसके रोकथाम के लिए कदम उठाने की जरूरत के तरफ आम जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।

ऐसे में आपके लिए मलेरिया के वायरस और इसके उपचार के उपायों को जानना बहुत जरूरी है। मलेरिया प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होने वाली संक्रामक बीमारी है। जो मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं- अनकॉमप्लिकेटेड मलेरिया और सीवियर मलेरिया। ऐसा माना जाता है, कि इससे सबसे ज्यादा गर्म स्थानों पर रहने वाले लोग प्रभावित होते है। समय पर इलाज न मिलने से इससे मरीज की मौत होने का खतरा बना रहता है।

इन लक्षणों से मलेरिया को पहचाने

  • बुखार
  • ठंड लगना
  • पसीना
  • सिरदर्द
  • मतली और उल्टी
  • थकान
  • शरीर में दर्द
  • एनीमिया
  • किडनी की समस्या
  • श्वसन संबंधी समस्याएं
  • निम्न रक्तचाप

अदरक
एनसीबीआई में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, मलेरिया के दौरान अदरक का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, इसमें एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो मलेरिया में होने वाले दर्द व मतली की समस्या से राहत दिलाने का काम करते हैं।

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इतनी मात्रा में करें सेवन
एक इंच अदरक के टुकड़े को एक या डेढ़ कप पानी में उबाल लें। फिर इसमें स्वादानुसार शहद मिलाकर हर दिन एक से दो कप इस मिश्रण का सेवन करें।

हल्दी
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन मलेरिया में दवा जैसा काम करता है। इसके अलावा हल्दी एक एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुण वाला मसाला भी है जो प्लास्मोडियम संक्रमण के कारण पैदा होने वाले विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है। साथ ही इसका एंटी-इंफ्लेमेटरी मलेरिया के कारण मांसपेशियों और जोड़ो में होने वाले दर्द को कम करने का काम करता है।

कितनी मात्रा में करें सेवन
एक चम्मच हल्दी पाउडर को एक गिलास दूध में अच्छी तरह से मिला लें। हर रोज रात में सोने से पहले इसका सेवन करें।

कलौंजी
एक स्टडी के अनुसार, कलौंजी में एंटी-मलेरियल गुण मौजूद होता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण मलेरिया के प्लाज्मोडियम संक्रमण से भी लड़ने का काम करता है। ऐसे में मलेरिया में इसका सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है।

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कितनी मात्रा में करें सेवन
आधा चम्मच कलौंजी पाउडर ले और इसे एक गिलास पानी के साथ गटक जाएं। हर दिन सुबह खाने से पहले इसकी खुराक लें।

मेथी के बीज
मेथी में इम्यूनिटी को बढ़ाने और एंटी-प्लाज्मोडियल प्रभाव के कारण मलेरिया के परजीवी से लड़ने की क्षमता होती है। इसलिए डॉक्टर्स भी मलेरिया से ग्रसित व्यक्ति को मेथी के बीजों को खाने की सलाह देते हैं।

कितनी मात्रा में करें सेवन
आधा चम्मच मेथी के बीजों को एक गिलास पानी में भिगोकर रातभर के लिए रख दें। और सुबह इसी पानी को छानकर खाली पेट इसका सेवन करें। इसे तब तक पिएं जब तक मलेरिया ठीक न हो जाए।

दालचीनी
दालचीनी मलेरिया में कारगर साबित हो सकती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल, एंटीसेप्टिक, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण के साथ ही परजीवी को खत्म करने वाला गुण भी होता है। जिसके वजह से यह मलेरिया से ठीक होने में आपकी मदद कर सकता है।

कितनी मात्रा में करें सेवन
एक चम्मच दालचीनी के पाउडर के साथ एक चुटकी काली मिर्च लेकर इस एक गिलास पानी में उबाल लें। अब इसे छान लें। इस तैयार मिश्रण को आप दिन में एक से दो बार तक पी सकते हैं।

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