समाचार सच, हल्द्वानी। गौला नदी में एक बार फिर बेल्चे-फावड़ों की खनक सुनाई देने लगी है। शनिवार को नदी में खनन कार्य शुरू होने से इस कारोबार से जुड़े लोगों के चेहरे खिल उठे हैं। हालांकि नदी से अभी दो गेटों से ही खनन कार्य शुरू हो पाया है। लेकिन शेष गेटों से भी जल्द खनन कार्य शुरू होने की उम्मीद है। गौला नदी को कुमाऊं की आर्थिक श्रोत का मुख्य माध्यम माना जाता है। इस नदी से हर वर्ष प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर करीब एक लाख लोग रोजगार से जुड़ते हैं। इस वर्ष जून माह में गौला नदी में खनन कार्य बंद कर दिया गया था। इसके बाद नदी को अक्टूबर माह में खनन के लिए खोलने की योजना थी। लेकिन वन विभाग व वन निगम की तैयारियां समय से पूरी न होने के चलते यह कार्य शुरू नहीं हो पाया। पखवाड़े भर पूर्व सड़क निर्माण, सीमांकन व अन्य तैयारियां पूरी होने के बाद वन विभाग ने निगम को खनन शुरू करने के लिए कहा, लेकिन तौल कांटा संचालकों के विवाद ने भी इस कार्य में व्यवधान उत्पन्न कर दिया। आखिरकार इस सबके बीच शनिवार को गौला नदी से खनन कार्य शुरू कर दिया गया। हालांकि प्रथम चरण में दो गेटों शीशमहल व हल्दूचौड़ से ही खनन निकासी शुरू की गई है। डीएफओ नीतीश मणि त्रिपाठी ने फीता काटकर इन गेटों से खनन कार्य शुरू कराया। इससे जहां इस कारोबार से जुड़े लोगों के चेहरे खिल गये। वहीं इससे सरकार को भी राजस्व का फायदा होगा। इस दौरान डीएफओ नीतीश मणि त्रिपाठी ने बताया कि गौला नदी से अवैध खनन रोकने की दिशा में विभाग तत्परता से काम कर रहा है। कहा कि खनन सत्र खुलने के बाद वन विभाग के लिए अवैध खनन पर अंकुश लगाना बड़ी चुनौती है, लिहाजा इस बार हाईटेक तकनीक से खनन कराया जा रहा है। इधर डीएलएम गौला वाइके श्रीवास्तव के अनुसार वन निगम शेष गेटों से भी खनन कार्य शुरू कराने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। जल्द ही अन्य गेटों से भी खनन निकासी शुरू कर दी जाएगी।
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