हल्द्वानी में पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और सेना के जवानों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, 2003 में आतंकियों से लोहा लेते हुए हुए थे वीरगति को प्राप्त
समाचार सच, हल्द्वानी।
देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले ऑपरेशन रक्षक के वीर शहीद हवलदार तिलक चंद्र को उनकी पुण्यतिथि पर बुधवार को हल्द्वानी स्थित जिला पूर्व सैनिक लीग कार्यालय, सैनिक मिलन केंद्र, जगदम्बा नगर में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि सभा में पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, गौरव सेनानियों और सेना के जवानों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा तथा उनके अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति को नमन किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शहीद कभी मरते नहीं, बल्कि अपने अद्वितीय बलिदान से देशवासियों के दिलों में सदैव अमर रहते हैं। हवलदार तिलक चंद्र का जीवन युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और साहस का प्रेरणास्रोत है।
पिथौरागढ़ जनपद के कनालीछीना विकासखंड स्थित ग्राम बचकोट (पीपली) में 16 जून 1966 को जन्मे तिलक चंद्र बचपन से ही भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना देखते थे। वर्ष 1985 में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद वे कुमाऊँ रेजिमेंट सेंटर में भर्ती हुए। प्रशिक्षण के बाद उनकी नियुक्ति 17 कुमाऊँ रेजिमेंट में हुई, जहां उत्कृष्ट सेवाओं के दम पर उन्होंने कई जिम्मेदारियां निभाईं और पदोन्नति प्राप्त की।
बाद में उनकी तैनाती 50 राष्ट्रीय राइफल्स में हुई, जहां जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान उन्होंने कई साहसिक ऑपरेशन में भाग लिया। 5 अगस्त 2003 को आतंकवादियों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में उन्होंने अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनके इस सर्वोच्च बलिदान को आज भी देश गर्व के साथ याद करता है।
कार्यक्रम में जिला पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल बी.एस. रौतेला ने शहीद हवलदार तिलक चंद्र के सैन्य जीवन, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि ऐसे वीर सैनिकों का बलिदान देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
श्रद्धांजलि सभा का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब 5 अगस्त 2003 की मुठभेड़ में उनके साथ मौजूद नायब सूबेदार देवेंद्र दफौटी ने उस दिन की घटना को याद करते हुए बताया कि हवलदार तिलक चंद्र ने अंतिम सांस तक आतंकवादियों का डटकर मुकाबला किया और अपने साथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए वीरगति प्राप्त की। उनकी आंखों देखी घटना सुनकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।
इस दौरान 50 राष्ट्रीय राइफल्स से आए सैनिकों ने भी शहीद को पुष्पांजलि अर्पित की तथा उनके परिजनों को सम्मान स्वरूप स्मृति-चिह्न भेंट कर उनके बलिदान को नमन किया।
कार्यक्रम में मेजर के.एस. महर, सूबेदार मेजर डी.एस. कन्याल, कैप्टन सुरेश भट्ट, सूबेदार पी.एस. परिहार, नायब सूबेदार दीवान सिंह राठौड़ सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, गौरव सेनानी एवं वीरांगनाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का समापन “भारत माता की जय” और “भारतीय सेना अमर रहे” के गगनभेदी नारों के साथ हुआ।

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