समाचार सच, देहरादून। साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बावजूद ठग नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। देहरादून के डालनवाला कोतवाली क्षेत्र में म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर अपराध से जुड़ी रकम अलग-अलग बैंकों के एटीएम से निकाले जाने का मामला सामने आया है। छह अलग-अलग बैंकों के एटीएम से कुल 5 लाख 61 हजार 256.53 रुपये की निकासी की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
दरअसल, इसी महीने की शुरुआत में एसटीएफ ने साइबर अपराधियों और उनके नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए सात दिवसीय ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट’ चलाया था। अभियान के दौरान ठगी की रकम निकालने वालों के साथ-साथ साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते, सिम कार्ड, एटीएम, चेक और अन्य डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस दौरान 15 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 247 संदिग्धों को कानूनी नोटिस जारी किए गए। इसके बावजूद साइबर अपराध के मामले सामने आना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।
ताजा मामला कोतवाली डालनवाला क्षेत्र का है। साइबर सेल की जांच में सामने आया कि करनपुर, ईसी रोड, राजपुर रोड, दर्शन लाल चौक, सर्कुलर रोड और 5जी क्रॉस रोड स्थित एटीएम से कई बार में रकम निकाली गई। पुलिस के अनुसार निकासी की कुल रकम 5,61,256.53 रुपये है।
जांच में एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक, केनरा बैंक, साउथ इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से रकम निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि आरोपियों ने किसी एक एटीएम को निशाना बनाने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर विभिन्न बैंकों के एटीएम से रकम निकाली।
साइबर सेल से रिपोर्ट मिलने के बाद करनपुर चौकी प्रभारी की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। अब पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि रकम निकालने वाले लोग कौन हैं और उनके पीछे साइबर ठगी का कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है।
पुलिस ने संबंधित एटीएम और घटनास्थलों की जानकारी जुटाने के साथ ही वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि म्यूल अकाउंट में रकम किस माध्यम से पहुंची और अलग-अलग एटीएम से इसे निकालने की पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
पुलिस की जांच के साथ यह मामला एक बार फिर लोगों को आगाह करता है कि अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम या अन्य बैंकिंग जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। मामूली लालच में बैंक खाता उपलब्ध कराना बाद में गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।

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