नैनीतालः सतत विकास के लिए जनभागीदारी अनिवार्य, पारंपरिक ज्ञान को मिले प्राथमिकताः लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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समाचार सच, नैनीताल। लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए जनसहभागिता और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने पर विशेष बल दिया।

बुधवार को नैनीताल स्थित डॉ. रघुनंदन सिंह टोलिया प्रशासनिक अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में वन पंचायत प्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय पंचायतों तथा शहरी निकायों के निर्वाचित सदस्यों को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना और उनके पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करना ही दीर्घकालिक पर्यावरणीय संतुलन का आधार है। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों, पंचायतों, वन पंचायतों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से ही प्रकृति संरक्षण के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने उत्तराखंड की वन पंचायतों को सामुदायिक वन प्रबंधन का सफल उदाहरण बताते हुए कहा कि ये न केवल जंगलों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रही हैं। इस दौरान उन्होंने प्रतिनिधियों से संवाद कर उनके अनुभव, समस्याएं और सुझाव भी सुने।

वन पंचायतों को लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी बताते हुए श्री बिरला ने कहा कि जमीनी स्तर की संस्थाएं ही सुशासन और संरक्षण की असली आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि वन पंचायतों के साथ संवाद करना लोकतंत्र की जड़ों से जुड़ने जैसा अनुभव है और यहां के प्रतिनिधियों का अनुभव किसी भी बड़े मंच से कम नहीं है।

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उन्होंने जल, जंगल और जमीन के आपसी संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि ये तीनों तत्व मानव जीवन और पारिस्थितिकी संतुलन के मूल आधार हैं। इनका संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक कर्तव्य है।

उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य प्रकृति और मानव के संतुलित सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण है। यहां की परंपराएं, जैसे जल और वृक्षों के प्रति श्रद्धा, आज भी सतत जीवनशैली का मार्गदर्शन करती हैं।

ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में वन संसाधनों के दोहन के खिलाफ स्थानीय समुदायों ने संघर्ष किया और 1930 के दशक से ही संरक्षण के लिए कानून और नीतियां बनती रही हैं। उन्होंने इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

श्री बिरला ने कहा कि वन और वन्यजीवों की सुरक्षा तभी संभव है जब स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने पंचायतों और नगरीय निकायों से अपील की कि वे पर्यावरण के अनुकूल आजीविका के अवसर विकसित करें और संतुलित विकास को बढ़ावा दें।

योग और आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकार्यता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पारंपरिक ज्ञान का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने औषधीय पौधों के संरक्षण, उनके मूल्य संवर्धन, शोध और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ समन्वय की दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाने पर बल दिया।

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वनाग्नि जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों के पास व्यावहारिक ज्ञान का भंडार है, जो इन समस्याओं से निपटने में बेहद उपयोगी है। यही लोकतंत्र की ताकत है, जहां अंतिम व्यक्ति की आवाज भी शासन तक पहुंचती है।

जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इससे मुकाबले के लिए जनभागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड का वन पंचायत मॉडल पूरे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है। उन्होंने वन संरक्षण में महिलाओं की सक्रिय भूमिका की भी सराहना की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रामसिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, आयुक्त कुमाऊं एवं सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पाण्डे सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने वनाग्नि नियंत्रण, वन पंचायतों के सशक्तिकरण, वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग और अधिकारों से संबंधित मुद्दों को उठाया। लोकसभा अध्यक्ष ने सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें केंद्र स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम से पूर्व नैनीताल आगमन पर श्री बिरला का स्वागत सांसद अजय भट्ट, आयुक्त कुमाऊं मंडल एवं सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत, आईजी रिद्धिम अग्रवाल और जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल द्वारा किया गया।

इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, मेयर हल्द्वानी गजराज बिष्ट, काशीपुर के मेयर दीपक बाली, शांति मेहरा सहित कई जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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