विपक्ष का रवैया आधी आबादी के साथ अन्याय: सांसद अजय भट्ट

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समाचार सच, हल्द्वानी। सांसद अजय भट्ट ने  नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ विपक्ष की वोटिंग को देश की आधी आबादी के खिलाफ अन्याय बताया है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास और मंशा हमेशा महिला विरोधी रही है। जो उन्होंने इंडी गठबंधन के साथ मिलकर संसद में किया, उसका जवाब देश जनता वोट के अधिकार से देगी। महिला अधिकारों की लड़ाई में बाधा को जीत बताना, विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिस तर मातृ शक्ति के सामर्थ्य से यह दशक उत्तराखंड का बन रहा है, ठीक ऐसे ही महिला अधिकार के इस विकल्परहित संकल्प को भाजपा अवश्य साकार करके रहेगी।

भाजपा संभाग कार्यालय मे आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए भट्ट  ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुसार, संसद में ष्यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताःष् के भारतीय दर्शन को आत्मसात करते हुए, संसद- विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को मंजूरी प्रदान करने लिए तीन बिल प्रस्तुत किए गए थे। लेकिन कांग्रेस और पूरा विपक्ष माताओं बहनों के हक को देने में सबसे बड़ी बाधा बने। प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र पर चलते हुए, आधी आबादी को उनका पूरा हक प्रदान करने का प्रयास किया ताकि मातृशक्ति विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे सके। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह विधेयक के सदन में गिरने पर कांग्रेस समेत विपक्ष द्वारा जश्न मनाया गया वह बेहद शर्मनाक था। नारी अधिकारियों की लड़ाई में बाधा उत्पन कर, उसे जीत दर्शाने से विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता उजागर हुई है। 

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इस मौके पर कहा  कि  16 और 17 अप्रैल को संसद में हुई चर्चा केवल कुछ विधेयकों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में समान भागीदारी देने का एक महत्वपूर्ण अवसर था। यह अवसर हमारी माताओं, बहनों और बेटियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता था। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने इस ऐतिहासिक अवसर का भी विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता दी और देशहित से ऊपर दलगत सोच को रखा। इन दलों का विरोध केवल संसदीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे यह स्पष्ट संकेत गया कि महिलाओं के अधिकारों के प्रश्न पर भी वे गंभीर नहीं हैं। 18 अप्रैल को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक का पारित न हो पाना इसी नकारात्मक और बाधक राजनीति का परिणाम है।

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इस दौरान पत्रकार वार्ता में विधायक सरिता आर्या,पार्टी महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष कंचन उप्रेती, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, महिला मोर्चा प्रदेश प्रवक्ता कल्पना बोरा, जिला मिडिया संयोजक महिला मोर्चा दीप्ति चुफ़ाल  उपस्थित रही। 

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