तिरंगे में लिपटा घर लौटा उत्तराखंड का लाल, अमरनाथ ड्यूटी से लौट रहे ITBP जवान की ट्रेन हादसे में मौत

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समाचार सच, चमोली। देश की सेवा का फर्ज निभाकर घर लौट रहा उत्तराखंड का एक और वीर सपूत तिरंगे में लिपटकर अपने गांव पहुंचा तो पूरा नारायणबगड़ गम में डूब गया। डूंगरी कड़ाकोट निवासी 35 वर्षीय आईटीबीपी जवान प्रदीप कुमार पुत्र पातीराम की पठानकोट रेलवे स्टेशन के पास हुए ट्रेन हादसे में मौत हो गई। रविवार को जब उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा तो अपनों की आंखों से आंसू थम नहीं सके।

प्रदीप कुमार भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 23वीं बटालियन, सीमाद्वार देहरादून में तैनात थे। वह अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पूरी करने के बाद वापस घर लौट रहे थे। लेकिन मंजिल तक पहुंचने से पहले ही पठानकोट में हुए हादसे ने परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए मातम में बदल दिया।

जवान की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को तिरंगे में लिपटा प्रदीप का पार्थिव शरीर जब नारायणबगड़ स्थित पैतृक घाट पहुंचा तो परिजनों का विलाप देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। जिस बेटे के घर लौटने का इंतजार था, वह तिरंगे में लिपटकर लौटा।

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अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। 23वीं बटालियन आईटीबीपी के कमांडेंट रिंकू सिंह के नेतृत्व में जवानों ने प्रदीप कुमार को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। पुलिस और प्रशासन की ओर से भी जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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प्रदीप कुमार के असमय निधन से डूंगरी कड़ाकोट ही नहीं, बल्कि पूरे नारायणबगड़ क्षेत्र में शोक की लहर है। जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने जवान के निधन को परिवार और क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

विधायक भूपाल राम टम्टा, ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला, यशपाल सिंह नेगी, नरेंद्र रावत, वीर भरत सिंह, जय नंद सती और दलीप नेगी समेत अन्य लोगों ने जवान के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश की सेवा में समर्पित जवान का इस तरह असमय चले जाना बेहद पीड़ादायक है।

एक मां ने अपना बेटा खोया, एक परिवार ने अपना सहारा और पहाड़ ने अपना वीर सपूत। तिरंगे में लिपटा प्रदीप हमेशा देश सेवा और अपने गांव के गौरव की याद बनकर लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।

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