समाचार सच, हल्द्वानी। लॉकडाउन के दौरान लोगों ने घरों में समय बिताने के लिए फिर से पुस्तकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इसके लिए धार्मिक व विभिन्न प्रकार की किताबें पढ़ी जा रही है। वहीं कॉमिक्स आदि के पीडीएफ भी खंगाले जा रहे हैं।

गौरतलब है कि लॉकडाउन के दौरान लोगों का रूझान फिर से पुस्तकों की तरफ लौटने लगा है। विभिन्न उम्र के लोग अपनी रूचि के अनुसार पुस्तक पढ़ रहे हैं। वहीं युवा पीढ़ी नेट के सहारे कॉमिक्स समेत तमाम पुस्तकों के पीडीएफ खंगाल रहे है। हालांकि छात्र-छात्राएं आजकल ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि युवा ही पुस्तकें पढ़ रहे हैं। वरन् बुजुर्ग भी पुस्तकों की तरफ आकृष्ट हो रहे हैं। वे धार्मिक किताबें पढ़कर अपना समय बिता रहे हैं। इसके अलावा साहित्यिक पुस्तकों को पढ़ते देखा जा रहा हे। जनरल नॉलेज के पुस्तकों के साथ-साथ उत्तराखण्ड का इतिहास भूगोल सम्बन्धी किताबों, मेडिकल इंजीनियरिंग, उपन्यास पढ़कर अपना समय बीता रहे हैं। युवा महिलाएं और गृहणी कहानियों, कुकरी सम्बन्धी साहित्य का अध्ययन कर रही हैं।

प्रेमचन्द का साहित्य आज भी लोकप्रिय
उपन्यासकार प्रेमचन्द का साहित्य आज भी लोगों की जेहन में ताजा है। निर्मला, गबन, रंगभूमि पढ़कर लोग अपना मनोरंजन कर रहे हैं। पाठक प्रेमचन्द के पात्रों में अपना अक्स तलाश रहे हैं।

उपन्यासों का जमाना फिर लौटा
भले ही उपन्यासों का समय अब चल गया हो, लेकिन लोग आज वेदप्रकाश शर्मा व जेम्स हेडली के उपन्यासों को फिर से पढ़ने के लिए लालायित है। इसके लिए पाठक लोग अपने मोबाइल पर इसे पढ़ने में व्यस्त है।
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