समाचार सच, हल्द्वानी। पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए बुधवार को श्री 1008 हैड़ा खान मंदिर, कठघरिया परिसर में दुर्लभ एवं पौराणिक महत्व वाले कल्पवृक्ष (बाओबाब) का विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रोपण किया गया। श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रकृति संरक्षण के साथ भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण का भी संदेश दिया।
मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य संतोष सती ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कल्पवृक्ष का रोपण कराया तथा इसकी धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय धार्मिक मान्यताओं में कल्पवृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है और इसे मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला दिव्य वृक्ष बताया गया है।
कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व रेंजर एवं पर्यावरणविद् मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कल्पवृक्ष समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक माना जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इसे वैज्ञानिक रूप से बाओबाब (Baobab) के नाम से जाना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम Adansonia digitata (एडान्सोनिया डिजिटाटा) है तथा यह Malvaceae (मैलवेसी) कुल का वृक्ष है।
मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि बाओबाब विश्व के सबसे अधिक आयु वाले वृक्षों में शामिल माना जाता है। इसकी विशाल तना संरचना, लंबे जीवनकाल तथा औषधीय गुणों के कारण इसे विशेष महत्व प्राप्त है। इसके फल, पत्तियां एवं छाल पारंपरिक चिकित्सा में भी उपयोगी मानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे दुर्लभ एवं उपयोगी वृक्षों का संरक्षण समय की आवश्यकता है और इनके रोपण से जैव विविधता के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में कल्पवृक्ष का रोपण धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके तथा दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचे।
इस अवसर पर मंदिर के पुजारी पूरन चंद हरबोला, सहायक पुजारी खिलानंद जोशी, श्रद्धालु सुमित अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने पौधे के संरक्षण तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा गया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित एवं हरित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

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