बीजेपी बोली- ‘श्री राम सेना’ से पार्टी का कोई संबंध नहीं, कांग्रेस का पलटवार- घटना ने मानसिकता उजागर की
समाचार सच, हल्द्वानी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद रामलीला मैदान के मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर उत्तराखंड की सियासत गरमा गई है। मामला अब राजनीतिक बयानबाजी से निकलकर सामाजिक सम्मान, जातिगत भेदभाव और धार्मिक आस्था के सवाल तक पहुंच गया है।
8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की जनसभा हुई थी। इसके तीन दिन बाद 11 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से उसी मंच पर पूजा-अर्चना और शुद्धिकरण यज्ञ किए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे दलित समाज के अपमान से जोड़ते हुए बीजेपी पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
BJP ने संगठन से किया किनारा
विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि शुद्धिकरण कार्यक्रम कराने वाले संगठन से पार्टी का कोई संबंध नहीं है।
कैबिनेट मंत्री एवं बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता खजान दास ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस जानबूझकर श्री राम सेना को बीजेपी से जोड़ने का प्रयास कर रही है। उन्होंने इसे निराधार और भ्रामक बताया।
खजान दास ने आरोप लगाया कि कांग्रेस रामलीला मैदान में लगाए गए कथित धर्म विशेष के नारों के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए शुद्धिकरण को जातिगत विवाद का रूप दे रही है।
उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान सनातन परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और वहां हुए कार्यक्रम को लेकर लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
‘खड़गे का नहीं, कांग्रेस की मानसिकता का शुद्धिकरण हो’- खजान दास
बीजेपी नेता ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि दलित समाज के सम्मान को लेकर कांग्रेस को बीजेपी पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास पर नजर डालनी चाहिए।
उन्होंने तीखा बयान देते हुए कहा कि “मल्लिकार्जुन खड़गे का नहीं, कांग्रेस की मानसिकता का शुद्धिकरण होना चाहिए।”
कांग्रेस ने बताया सामाजिक भेदभाव
वहीं कांग्रेस ने बीजेपी के इस बचाव को स्वीकार नहीं किया है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने आरोप लगाया कि किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद मंच का शुद्धिकरण कराया जाना सामाजिक भेदभाव की मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी को केवल संबंधित संगठन से दूरी बनाने के बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी मानसिकता को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।
कांग्रेस का आरोप है कि घटना ने बीजेपी की कथित दलित विरोधी सोच को उजागर किया है।
BJP महामंत्री बोले- पार्टी का कोई पदाधिकारी शामिल नहीं
बीजेपी प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने भी पार्टी का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि बीजेपी जातिवाद में विश्वास नहीं करती और समाज के सभी वर्गों का सम्मान करती है।
उन्होंने कहा कि हल्द्वानी की घटना में बीजेपी के किसी पदाधिकारी या कार्यकर्ता की भूमिका सामने नहीं आई है। किसी संगठन या व्यक्ति के कृत्य को सीधे बीजेपी से जोड़ना उचित नहीं है।
खड़गे ने राज्यसभा में भी उठाया था मामला
इस पूरे विवाद की गूंज अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मामले को राज्यसभा में उठाया है। वहीं बीजेपी की ओर से पहले ही संबंधित संगठन से दूरी बनाए जाने की बात कही जा चुकी है।
अब विवाद का केंद्र यह बन गया है कि क्या यह किसी संगठन की स्वतंत्र गतिविधि थी या इसके पीछे कोई राजनीतिक भूमिका थी? कांग्रेस इस मामले को सामाजिक सम्मान और दलित अस्मिता से जोड़कर बीजेपी को घेर रही है, जबकि बीजेपी कांग्रेस पर सनातन और जाति के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।
आगामी दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।

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