पिथौरागढ़ कांग्रेस में बवाल: निष्कासित नेताओं ने खोला मोर्चा, हाईकमान तक पहुंचेगी लड़ाई

खबर शेयर करें

समाचार सच, पिथौरागढ़। उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित किए गए तीन वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने पार्टी की कार्रवाई को पूरी तरह एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताया है। प्रेस वार्ता में नेताओं ने साफ कहा कि वे अब दिल्ली जाकर पार्टी हाईकमान और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के सामने अपना पक्ष रखेंगे।

निष्कासित नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस कार्यक्रम में अनुशासनहीनता का हवाला देकर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, उसी मंच पर मौजूद विधायक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि अगर नियम सभी के लिए बराबर हैं तो कार्रवाई भी समान रूप से होनी चाहिए।

यह भी पढ़ें -   बुलंदशहर यूपी का कपिल आया था रोजी-रोटी कमाने उत्तराखंड…एक पल में उजड़ गया परिवार

पूर्व दर्जा राज्य मंत्री महेंद्र सिंह लुंठी ने कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर तक नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया एकतरफा रही और न्याय के बजाय चुनिंदा लोगों को निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस लड़ाई को दिल्ली तक ले जाएंगे और हाईकमान के सामने पूरे मामले की जानकारी देंगे।

महिला कांग्रेस की पूर्व जिला अध्यक्ष भावना नगरकोटी ने भी निष्कासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से नोटिस भेजा गया, जिसे वह वैध नहीं मानतीं। उनका दावा है कि उन्हें मंच पर बुलाया गया, लेकिन अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को साजिश करार देते हुए कहा कि अब वह अपनी बात सीधे पार्टी नेतृत्व के सामने रखेंगी।

यह भी पढ़ें -   7 जुलाई 2026 का पंचांग: आज कालाष्टमी व्रत, हरेला बोने की शुरुआत, जानें सभी राशियों का हाल

वहीं पीसीसी सदस्य दीपक लुंठी ने भी पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक के खिलाफ पहले की घटनाओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि उनके खिलाफ तुरंत फैसला ले लिया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी में दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जाएंगे और विधायक पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद पिथौरागढ़ कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी हाईकमान निष्कासित नेताओं की दलील सुनने के बाद क्या फैसला लेता है। वहीं राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस का यह अंदरूनी विवाद आने वाले विधानसभा चुनावों में विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है।

Ad AdAd Ad Ad Ad AdAd Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440