किसी कार्मिक की दुर्भाग्यवश जीवन हानि होती है तो उनके स्वजन को मिलेगी 10 लाख रुपये की राहत राशि
समाचार सच, देहरादून। ऊर्जा निगमों के विभिन्न कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांग निस्तारित कर दी गई है। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि ऊर्जा निगमों की सेवाएं अत्यावश्यक हैं। इनमें कार्यरत समस्त नियमित, उपनल, संविदा और आउटसोर्सिंग कार्मिक पहले से ही कोरोना वारियर के रूप में शामिल हैं। ऊर्जा निगमों के कर्मचारी संगठनों की ओर से बार-बार यह मांग उठाई जा रही है कि ऊर्जा निगमों की सेवाओं को अत्यावश्यक सेवाओं में शामिल कर उन्हें कोरोना वारियर घोषित किया जाना चाहिए। सचिव राधिका झा ने इस मांग का संज्ञान लेकर कर्मचारी संगठनों और उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों से वार्ता की। उन्होंने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की। साथ ही यह भी कहा कि जिन कठिन परिस्थितियों में बिजली कार्मिक पूरे मनोयोग और तत्परता से कार्य कर रहे हैं, वह अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने बताया कि नौ अप्रैल, 2020 को जारी शासनादेश के मुताबिक कोरोना वारियर के रूप में कार्य करते हुए किसी कार्मिक की दुर्भाग्यवश जीवन हानि होती है तो उनके स्वजन को 10 लाख रुपये की राहत राशि मिलेगी। उनकी ओर से इस संबंध में तीनों निगमों के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए जा चुके हैं। कोई भी ऊर्जा कार्मिक अपने दायित्वों के निर्वहन के दौरान कोरोना संक्रमित हो जाते हैं अथवा दिवंगत हो जाते हैं तो उन्हें अथवा उनके स्वजन को राहत राशि अनुमन्य करने के अतिरिक्त यथासंभव अन्य सहायता भी दी जाए। ऊर्जा सचिव ने कहा कि तीनों निगमों के कार्मिकों के लगातार संक्रमित होने के मद्देनजर प्रबंध निदेशकों को निगमों में प्रतिष्ठित चिकित्सकों का पैनल तैयार कर संबंधित कार्मिक को टेलीमेडिकेयर परामर्श सुविधा देने के निर्देश दिए गए हैं। कोरोना टीकाकरण के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कर समय पर कार्मिकों का टीकाकरण कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग से संपर्क कर ऊर्जा निगमों के मुख्यालयों और जिला कार्यालयों पर टीकाकरण के लिए कैंप लगाने की कार्यवाही के लिए भी कहा गया है। कर्मचारी संगठनों से वार्ता के निर्देश तीनों निगमों के प्रबंध निदेशक कर्मचारी संगठनों से प्राप्त मांगपत्रों पर विचार कर कर्मचारी संगठनों से वार्ता करेंगे। प्रबंधन स्तर की जायज मांगों पर कार्यवाही करने और शासन स्तर से संबंधित मांगे सचिव को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि कर्मचारियों का मनोबल बना रहे।
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