मानसिक रोगियों के लिए हल्द्वानी में स्पर्श न्यूरोसाइट्रिक सेंटर बना वरदान

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मनोविकारों को न करें नजरअंदाज, समय पर विशेषज्ञ इलाज से मरीज को मिलती है नई जिंदगी

समाचार सच, हल्द्वानी। समाज में जागरूकता की कमी और अज्ञानता के कारण मानसिक रोगों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। अक्सर लोग मनोविकारों को गंभीरता से नहीं लेते, जिससे मरीज की स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती चली जाती है। कई मामलों में रोगी के असामान्य व्यवहार को नजरअंदाज कर दिया जाता है या झाड़-फूंक और टोटकों का सहारा लिया जाता है, जिससे बीमारी और अधिक जटिल हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसिक रोगियों को शुरुआती चरण में ही कुशल मनोचिकित्सकों की देखरेख में इलाज मिल जाए, तो उन्हें काफी राहत मिल सकती है। पहले स्थिति यह थी कि जब तक मरीज को अस्पताल लाया जाता, तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी होती थी। कई बार मरीज घर छोड़ देता था या परिवारजन मजबूरी में उसे अकेला छोड़ने को विवश हो जाते थे। इसी कारण हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में अनेक मानसिक रोगों से पीड़ित लोग भटकते हुए नजर आते हैं। जानकारों का कहना है कि समय पर इलाज मिल जाता, तो उनकी स्थिति इतनी दयनीय नहीं होती।

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पूर्व में हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में मानसिक रोग विशेषज्ञों की कमी थी, जिसके चलते मरीजों को बरेली, दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में ले जाना पड़ता था। अब हालात काफी बदल चुके हैं। आज हल्द्वानी में कई योग्य और अनुभवी मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं, जिनकी वजह से आसपास के जिलों से भी लोग यहां इलाज कराने पहुंच रहे हैं।

इन्हीं विशेषज्ञों में अल्मोड़ा के मूल निवासी और पहाड़ की माटी से जुड़े डॉ. रवि सिंह भैंसोड़ा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वे हल्द्वानी के अनुभवी मनोचिकित्सकों में शुमार हैं और अब तक कई गंभीर मानसिक रोगियों को स्वस्थ जीवन की ओर लौटाने में सफल रहे हैं। डॉ. भैंसोड़ा ने पद्मश्री डॉ. वाई. वी. पाटिल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, वर्धा से एमडी की उपाधि प्राप्त की है।

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वर्तमान में वे हल्द्वानी के पीलीकोठी क्षेत्र में स्थित स्पर्श न्यूरोसाइट्रिक सेंटर का संचालन कर रहे हैं। इससे पहले वे सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में भी विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके केंद्र में व्यसन मुक्ति, अवसाद, मनोविदलता (विखंडित मानसिकता), द्विध्रुवीय विकार, मनोभ्रंश, गंभीर सिरदर्द या माइग्रेन, चिंता विकार, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर, न्यूरोपैथी, मिर्गी, फोबिया, व्यवहार संबंधी समस्याएं और अन्य मानसिक रोगों का उपचार किया जाता है।

डॉ. रवि सिंह भैंसोड़ा का कहना है कि वर्तमान समय में मानसिक रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन यदि मरीज को समय रहते सही इलाज मिल जाए तो उसकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि मानसिक रोगों को हल्के में न लें और विशेषज्ञ से समय पर उपचार कराएं, ताकि मरीज सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सके।

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