विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष : एकांत में जीवन जीने की कला सिखाती हैं पुस्तकें

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समाचार सच, हल्द्वानी। दुनिया कोरोनावायरस महामारी के कारण लॉकडाउन में है। इस समय किताबें पढ़ना सबसे अच्छा रहेगा जिससे लोगों की बोरियत भी कम होगी और नया सीखने को भी मिलेगा। ऐसी ही बातें विश्व पुस्तक दिवस के मौके पर फिर से होने लगी है। सोशल मीडिया पर किताबें पढ़ने की सलाह दी जा रही है और पसंदीदा किताबों के बारे में भी पूछ रहे हैं।

गौरतलब है कि 23 अप्रैल 1995 को सबसे पहले विश्व पुस्तक दिवस मनाया गया था। तब से हर बरस ये मनाया जा रहा है। इधर द नोबेल प्राइज कमिटी ने ट्वीट कर रबींद्रनाथ टेगौर को कोट करते हुए कहा, ‘उच्च शिक्षा वो है जो न केवल सूचनाएं देता है बल्कि हमारी जिंदगी को शांतिप्रिय भी बनाता है’। वहीं धार्मिक संत सतगुरू ने लिखा, ‘यदि आप किताब प्रेमी हैं तो लॉकडाउन अच्छा समय है। आप बिना अपनी कुर्सी से उठे पूरी दुनिया की सैर कर सकते हैं’।

किसी कवि ने पुस्तकों के बारे में क्या खूब लिखा है –
‘‘करती है बातें बीते जमाने की दुनियां से इंसानों की आज की कल की,
एक-एक पल की खुशियों की गमों की फूलों की बमों की, जीत की हार की।
क्या तुम नहीं सुनतें इन किताबों की बातें,
किताबें कुछ कहना चाहती है, तुम्हारे पास रहना चाहिए।

पुस्तक दिवस पर क्या बोले साहित्यकार व बुद्धिजीवी

वरिष्ठ लेखक 85 वर्षीय शक्ति प्रसाद सकलानी लगभग डेढ़ दर्जन पुस्तकों की रचना कर चुके है। उनका कहना है कि पुस्तकें जीवन भर साहित्य प्रेमियों का साथ देती आयी है। वहीं एकांत में भी समय व्यतीत करने का साधन पुस्तकों का पठन-पाठन है। मूल रूप से टिहरी गढ़वाल व वर्तमान निवासी रूद्रपुर शक्ति प्रसाद सकलानी ने पुस्तक दिवस पर सभी साहित्य प्रेमियों विश्व पुस्तक दिवस की बधाई दी। वर्तमान में वे थर्ड जेन्डर (किन्नरों) के ऊपर एक किताब रचना में व्यस्त हैं।

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एमबीपीजी कालेज की हिन्दी विभाग की प्रो0 डा0 प्रभा पंत ने कहा कि पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र होती हैं। यह हमें राह दिखाती है। हमें पुस्तकें खरीदनी चाहिए और मित्रों को भी उपहार में पुस्तक भेंट करनी चाहिए। आज लॉकडाउन के दौरान हमें समय मिला है, इसका सदुपयोग कर हमें स्व0 पुस्तक पढ़ने में लगाना चाहिए। पुस्तकों से सकारात्मक संचार होता है।

स्वास्थ्य विभाग से रिटायर शिवराज भंडारी का कहना है कि पुस्तकें समय व्यतीत और ज्ञानार्जन के लिए बेहतर हैं। वे उनका एक कविता संग्रह छपने को तैयार है। आजकल वे एक उपन्यास पर लेखन कार्य कर रहे है। हल्द्वानी निवासी वर्षीय शिवराज का कहना है कि मैं आजकल घर पर पांच घंटे पुस्तकों का अध्ययन करता हूं।

पुस्तक प्रेमी व पीपीएस अधिकारी अमित श्रीवास्तव का कहना है कि वर्तमान में विश्व में जो माहौल व भ्रातियां विद्यमान है, उनकों दूर करने के लिए पुस्तक बेहतर माध्यम हो सकती है। पुस्तकें हमें अन्धकार से उजाले की ओर ले जाते है। उन्होंने अभी तक तीन पुस्तकें ‘बाहर मैं मैं अन्दर’ (कविता संग्रह), पहला दखल (संस्मरण) और गहन ये अन्धकारा (उपन्यास) लिखी हैं। वे वर्तमान में विजिलेंस के हल्द्वानी सेक्टर में एसपी हैं।

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हास्य कवि राजकुमार भंडारी ने सर्वप्रथम विश्व पुस्तक दिवस की शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान पुस्तकें पढ़कर समय व्यतीत हो रहा है। वैसे पुस्तकें हमारी सच्ची साथी है, खाली समय में हमें पुस्तकों को पढ़ना चाहिए।

लेखिका व कवयित्री गौरी मिश्रा का कहना है कि हमें अपने आपको जानने के लिए पुस्तक बेहतर साधन है। हमें अध्यात्मक की तरफ रूख करना चाहिए। पौराजिक ग्रन्थों को पढ़कर बुराइयों को दूर करने का बीड़ा उठाना चाहिए। विशेषकर प्रकृति हमसे कुपित हो गयी है, इसलिए हमें प्राकृतिक साधनों का दुरपयोग नहीं करना चाहिए।

कवि अशोक वार्ष्णेय का कहना है कि विश्व पुस्तक दिवस मनाने की सारगर्भित परम्परा हम सभी के लिये एक नया संदेश लेकर आती है. वर्तमान डिजिटल युग मे पुस्तकों का पठन -पाठन बेशक कुछ कम हो गया है। परंतु इन पुस्तकों का महत्व आज भी बना है। पुस्तकें हमारे जीवन की सच्ची साथी तो हैं ही, पर ये हमारे जीवन की पथ प्रदर्शिका बन कर हमारे जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने मे पूर्ण सहयोग करती हैं। पुरातन काल से ही विश्व मे पुस्तकों के बल पर ही विभिन्न प्रकार के विकास कार्य खोजे गये, जिनका लाभ आज हम सबके सामने है। विश्व पुस्तक दिवस पर आप सभी को बहुत बहुत बधाइयां एवं हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए व्यस्तम समय में से थोडा़ समय निकाल कर संदेशात्मक पुस्तकों का नियमित पाठन कर जीवन में सकारात्मक बदलाव लायें।
विश्व पुस्तक दिवस पर करते हम सब आगाज,
जीवन की सच्ची साथी है पुस्तक,
पुस्तक ही पढ़ राह दिखातीं और बज उठते सुंदर साज।

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