स्ट्रेस, डिप्रेशन में इन योग को नियमित करके मेंटली हेल्दी रह सकते हैं, एक्सपर्ट से जानें फायदे और अभ्यास का तरीका

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। योग के नियमित अभ्यास से संपूर्ण स्वास्थ्य पर पॉजिटिव असर पड़ता है। आप लंबी उम्र तक स्वस्थ और निरोग रह सकते हैं। योग में आसन, प्राणायाम, ध्यान शामिल होता है। योग आत्म-परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करने का सबसे अच्छा साधन है। योग की पारंपरिक तकनीक मन, शरीर और आत्मा के बीच एक शक्तिशाली संबंध बनाने में मदद करती है। जैसे-जैसे शरीर, मन और श्वास योग के अभ्यास से जुड़ते हैं, कल्याण की गहरी भावना पैदा होती है। आप तन-मन से खुश रहने लगते हैं। योग तनाव को दूर रखने में मदद करता है। यदि आपको स्ट्रेस, एंजायटी, डिप्रेशन आदि की समस्या है तो आप नियमित रूप से योग का अभ्यास करें। अक्षर योग संस्थान के योग और आध्यात्मिक गुरु हिमालयन सिद्ध अक्षर स्ट्रेस, डिप्रेशन आदि को दूर करने के लिए कुछ योग और उसे करने के तरीके बता रहे हैं। आप इन योग को नियमित करके मेंटली हेल्दी रह सकते हैं।

योग के फायदे
योग के अभ्यास के कई सेहत लाभ हैं। सांस पर ध्यान देते हुए योग आसन किए जाते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार करता है, फोकस को तेज करता है और शरीर को मजबूत बनाता है। मानसिक समस्याएं जैसे तनाव, चिंता, ध्यान की कमी, अवसाद आदि के लक्षणों को कम करने में भी बेहद कारगर है।

प्राणायाम
प्राणायाम एक श्वास तकनीक है, जो हमारे शरीर के चौनलों को स्पष्ट रहने में सहायता करती है। प्राणायाम के मन और शरीर के लिए व्यापक लाभ हैं, जैसे मानसिक स्पष्टता, मन की शांति, फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि, सहनशक्ति आदि को बढ़ाती है।

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ध्यान
चिंता, तनाव और अन्य मानसिक स्वास्थ्य वाले लोगों को दृढ़ता से ध्यान या मेडिटेशन का अभ्यास करने की सलाह दी जाती है। ध्यान का कार्य आंतरिक शांति, मानसिक स्पष्टता, निर्णय लेने में सुधार, अंतर्ज्ञान को तेज करता है। इसके कई अन्य लाभ भी होते हैं। मेडिटेशन करने से स्ट्रेस, एंजायटी, डिप्रेशन आदि के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

संतुलनासन
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और ऊपरी शरीर, श्रोणि और घुटनों को ऊपर उठाएं. घुटनों को सीधा करें। सुनिश्चित करें कि घुटने, श्रोणि और रीढ़ एक सीध में हों कलाइयों को कंधों के नीचे संरेखित करके रखें। संतुलनासन करने से शरीरिक और मानसिक सेहत अच्छी बनी रहती है।

अधोमुखी संवासन
एक टेबल टॉप जैसी आकृति बना ले। ध्यान दे की हथेलियां कंधों के नीचे और घुटने कूल्हों के नीचे हों. कूल्हों को ऊपर उठाएं, घुटनों और कोहनियों को सीधा करें और उल्टे ‘वी’ का आकार बनाएं। अब हाथों को कंधों की चौड़ाई जितना अलग रखें। उंगलियां आगे की ओर रहेंगी। हथेलियों पर दबाव डालें और कंधे के ब्लेड्स को खोलें. एड़ियों को फर्श पर धकेलने की कोशिश करें। अधोमुखी संवासन का अभ्यास आप डेली कर सकते हैं।

पश्चिमोत्तानासन
इसे करने के लिए दंडासन से शुरुआत करें। सुनिश्चित करें कि घुटने थोड़े मुड़े हुए हों और पैर आगे की ओर फैले हों। बाहों को ऊपर की ओर फैलाएं और रीढ़ को सीधा रखें. सांस छोड़ें, जिससे पेट की हवा खाली हो जाए। सांस छोड़ते हुए, कूल्हे पर आगे की ओर झुकें और ऊपरी शरीर को निचले शरीर पर रखें. बाहों को नीचे करें और अपने बड़े पैर की उंगलियों को पकड़ें। घुटनों को नाक से छूने की कोशिश करें।

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बद्ध कोणासन
इसकी शुरुआत दंडासन से करें. पैरों को मोड़ें और तलवों को एक साथ लाएं। एड़ियों को श्रोणि के करीब खींचें. धीरे से घुटनों को नीचे धकेलें। पेट से हवा खाली करें। ऊपरी शरीर को आगे की ओर झुकाएं और माथे को फर्श पर रखें।

मार्जरी आसन और अधोमुखी मर्जरी आसन
घुटनों के बल बैठ जाएं। हथेलियों को कंधों के नीचे और घुटनों को कूल्हों के नीचे रखें। सांस लें और ऊपर देखते हुए रीढ़ को मोड़ें। अधोमुखी मर्जरी आसन करने के लिए सांस छोड़ें. रीढ़ की हड्डी को इस तरह मोड़ें कि पीठ का आर्च बन जाए और गर्दन को नीचे आने दें। नज़रों को छाती की ओर केंद्रित करें।

भस्त्रिका प्राणायाम
श्वास लें और फेफड़ों में हवा भरें. पूरी तरह से सांस छोड़ें। सांस लेना और छोड़ना 1-1 के अनुपात में किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि 6 काउंट के लिए सांस लेते हैं, तो सांस छोड़ने के लिए 6 काउंट होने चाहिए। इसके अलावा, आसनों के साथ-साथ सूर्य नमस्कार का अभ्यास भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भी किया जाता है। योग में आसन, प्राणायाम, ध्यान आदि सभी अंग एक साथ कार्य करते हैं, इसलिए अलग-अलग या क्रमिक रूप से करने की बजाय विभिन्न पहलुओं पर एक साथ आग बढ़ने की कोशिश करें।

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