संतुलित जीवन जीने के अचूक उपाय

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारी जीवनशैली, खान-पान, आदतों और चिंतन-मनन आदि से है। यदि इनमें खामियां हों, तो दुनिया की कोई भी दवा हमें निरोग नहीं रख सकती। हम सुबह से लेकर शाम तक जो खाते हैं, पीते हैं, उठते हैं, बैठते हैं या अन्य जो भी गतिविधियां करते हैं, उन सबका सम्मिलित प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। यदि दिनचर्या असंतुलित हो, तो स्वास्थ्य चौपट हो जाता है और यदि इसमें सुधार कर लिया जाए, तो दवाओं की गुलामी से छुटकारा मिल जाता है और शरीर स्वस्थ-सबल बना रहता है।
सुबह में जल्दी उठें
सुबह में सूर्याेदय से कम-से-कम 1 घंटा पहले उठने से न केवल हम ऊर्जा से भरपूर बने रहते हैं, बल्कि शरीर में हल्कापन, स्फूर्ति व ताजगी महसूस होती है। पक्षियों की चहचहाहट व ताजी हवा से स्ट्रैस (तनाव) दूर होता है। बायोलॉजिकल क्लॉक सुबह में आंतों की सफाई करती है और समय पर शरीर से मल-मूत्र बाहर निकल जाने से शारीरिक विषाक्तता (टाक्सिसिटी) दूर होती है। सुबह में जल्दी उठने मात्र से एसिडिटी व अपच की समस्या से छुटकारा मिल जाता है और मेटाबॉलिज्म (चयापचय) में सुधार होता है।
उषःपान करें
सुबह में उठते ही जो पानी पिया जाता है, उसे उषापान या उषरूपान कहा जाता है। तांबे के बर्तन में रातभर रखा हुआ पानी अमृत के समान गुणकारी है। शोध में यह सिद्ध हो चुका है कि तांबे के बर्तन में रखे पानी में 200 प्रकार के बैक्टीरिया अपने आप नष्ट हो जाते हैं।
सुबह में तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने से धीरे-धीरे सभी प्रकार के रोग-विकार ठीक होने लगते हैं। अतरू सुबह उठते ही पानी जरूर पीना चाहिए।
व्यायाम करें
नित्यक्रिया से निवृत्त होकर रोजाना 30 से 45 मिनट तक कोई भी व्यायाम करें। रोजाना व्यायाम करने से न केवल शरीर, बल्कि मनोमस्तिष्क भी स्वस्थ रहता है, बुद्धि बढ़ती है, अनेक बीमारियों से बचाव होता है और वजन कंट्रोल में रहता है। व्यायाम करने से नींद अच्छी आती है, ऑक्सीजन भरपूर मिलने पर शरीर की सारी क्रियाएं सुचारू रूप से होती हैं, ऊर्जा का संचार होता है और जीवनी शक्ति बढ़ती है। अतः रोजाना नियमित रूप से व्यायाम जरूर करें।
मालिश और स्नान जरूर करें
रोजाना मालिश और स्नान स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायी है। मालिश और स्नान से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है, जिससे त्वचा में ग्लो बढ़ जाता है, बदन दर्द व थकान दूर होती है, खुलकर भूख लगती है, मेटाबॉलिक रेट (चयापचय दर) बढ़ जाता है, जिससे शरीर में जमा चर्बी (फैट) पिघलने लगती है, त्वचा पर मौजूद धूल-मिट्टी के कण, मृत कोशिकाएं (डैड सैल्स), कीटाणु व पसीना आने के बाद जमी परत हट जाती है और त्वचा में निखार आ जाता है तथा त्वचा संबंधी रोग दूर होते हैं और स्किन प्रॉब्लम्स से बचाव होता है।
सुबह नाश्ता जरूर लें
सुबह नाश्ता लेना बहुत जरूरी है। रात के भोजन के बाद सुबह तक काफी समय का अंतराल हो जाता है और सुबह में शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है। अतरू नाश्ता करके यह ऊर्जा की जरूरत पूरी की जा सकती है। सुबह के नाश्ते में दूध, फल, कॉर्नफ्लैक्स, रोटी, दही, रबड़ी, दलिया, ड्राई फ्रूट्स, सेब, केला, संतरा आदि लिए जा सकते हैं।
समय पर गहरी नींद लें
समय पर नींद लेना भी हमारे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेने वालों का हृदय ज्यादा स्वस्थ रहता है। भरपूर नींद लेने से ब्रेन की अलर्टनैस बढ़ती है और ब्रेन को दिनभर के कार्यों को याद करके सही रूप में सहेजने तथा फिर से याद करने में मदद मिलती है। नींद पूरी तरह शरीर को तरोताजा करती है। सैल्स की रिपेयरिंग का काम (नवनिर्माण) नींद में ही होता है। गहरी नींद से शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। कुल मिलाकर यूं कहें कि स्वस्थ रहने के लिए पूरी नींद लेना बहुत जरूरी है।
प्रकृति के नजदीक रहें
रोजाना थोड़ा समय प्रकृति के बीच गुजारें, जहां कृत्रिम प्रकाश, कृत्रिम हवा, कृत्रिम जल आदि न हो। मिट्टी, पानी, धूप, हवा-ये सभी प्रकृति के वे भाग हैं जो हमें स्वास्थ्य देते हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि प्रकृति के नजदीक रहने वालों को नींद अच्छी आती है, मन प्रसन्न रहता है, मानसिक थकान दूर होती है और शरीर निरोग रहता है। इसलिए प्राकृतिक जलस्रोत, मिट्टी, पहाड़, जंगल, बगीचे व हरियाली में रोजाना थोड़ा समय जरूर बिताना चाहिए।
क्रोध से बचें
क्रोध से रक्त प्रवाह तेज हो जाता है, हार्ट रेट व स्ट्रैस बढ़ जाता है तथा टिशु व आर्गंस कमजोर होते हैं। क्रोध से पित्त बढ़ता है और यह मैटाबॉलिक सिस्टम को, जोकि कोशिका के लैवल पर होता है, बिगाड़ देता है। इस प्रकार इम्यून सिस्टम कमजोर होकर रोगों के लिए आधार मिल जाता है। अतः क्रोध न करें, हमेशा शांत व प्रसन्न रहने का प्रयास करें।
नशीले पदार्थों से दूर रहें
आयुर्वेद में मद्य (मदिरा) यानी शराब को ओज का नाशक बताया गया है। शराब इम्युनिटी का नाश करके तन-मन के लिए विष का काम करती है। शराब शरीर की उष्णता बढ़ाकर टैम्प्रेचर बढ़ाती है, एक्जिमा व अन्य स्किन डिजीज का कारण बनती है तथा लिवर, किडनी, हार्ट व वेसल्स को नुक्सान पहुंचाती है। इसी प्रकार धूम्रपान, गुटखा, तंबाकू, स्मैक आदि सभी नशीले पदार्थों का प्रयोग भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

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