समाचार सच, हल्द्वानी डेस्क।
गांवों में हरियाली बढ़ाने के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में ‘अमृत वाटिका’ योजना की पहल शुरू की गई है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की अपनी जमीन पर फलों के बगीचे विकसित किए जाएंगे। इसके लिए चयनित किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस पहल की शुरुआत पहले चरण में बिंदुखत्ता क्षेत्र से की गई है। पिछले सप्ताह क्षेत्र में करीब 100 फलदार पौधों का रोपण किया गया। योजना को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी है, ताकि आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक गांवों में फलोत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।
दो बीघा जमीन में तैयार होंगे फलदार बगीचे
अमृत वाटिका योजना के तहत इच्छुक किसानों को अपनी जमीन में दो बीघा क्षेत्र बगीचे के लिए अलग रखना होगा। खास बात यह है कि जमीन का स्वामित्व किसान का ही रहेगा और बगीचे से होने वाले फल उत्पादन का लाभ भी किसान को ही मिलेगा।
योजना में किसानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रखी गई है। पौधों की सुरक्षा के लिए तारबाड़, सिंचाई और नियमित देखभाल की व्यवस्था किसान को स्वयं करनी होगी। इससे पौधों के संरक्षण के साथ बगीचे को लंबे समय तक विकसित करने की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित होगी।
हरियाली के साथ आय बढ़ाने का लक्ष्य
इस पहल से जुड़े पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पन्त का कहना है कि यदि किसान अपनी रुचि और पूरी जिम्मेदारी के साथ फलदार पौधे लगाएंगे तो उनके संरक्षण की संभावना भी अधिक होगी। लंबे समय में यही पौधे फल उत्पादन का जरिया बनकर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अमृत वाटिकाओं के माध्यम से एक ओर गांवों में हरित क्षेत्र बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर फलोत्पादन के जरिए लोगों के लिए अतिरिक्त आय का रास्ता तैयार होगा।
अगले वर्ष बड़े स्तर पर फलोत्पादन की तैयारी
डॉ. पन्त ने बताया कि वर्तमान में बरसात का मौसम समाप्ति की ओर है। ऐसे में अगले वर्ष पहले से बेहतर योजना तैयार कर बड़े स्तर पर फलदार पौधों के रोपण और फलोत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
उनका कहना है कि यह पहल केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्देश्य ऐसे स्थायी फलदार बगीचे विकसित करना है, जिनका लाभ आने वाले वर्षों तक किसान और उनका परिवार उठा सके।
सहयोगियों का जताया आभार
बिंदुखत्ता में अमृत वाटिका की शुरुआत में उत्तराखंड शासन के पूर्व अपर सचिव जीवन चंद्र उप्रेती और पूर्व कैप्टन सुंदर सिंह खनका के सहयोग का भी उल्लेख किया गया। डॉ. आशुतोष पन्त ने दोनों सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल को आगे बढ़ाने में मिले सहयोग के लिए वह हृदय से आभारी हैं।
अमृत वाटिका की यह पहल यदि व्यापक स्तर पर आकार लेती है तो ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार वृक्षों का विस्तार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय स्तर पर फल उत्पादन को एक साथ बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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