समाचार सच, हल्द्वानी। कोरोना की मार से उत्तराखंड कराह रहा है। शमशान पूरी तरह से भर जाने से यहां का आलम ये हो गया है कि अब कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार खेतों में कराया जा रहा है। उत्तराखंड में कई जगहों पर खेतों में चिताएं जलती दिख रही है। यह दृश्य वाकई झकझोर करने वाला है।
उत्तराखण्ड की रहने वाली और आजतक न्यूज चैनल की एंकर मीनाक्षी कंडवाल ने इस हृदय विदारक दृश्य को बड़े मार्मिक ढंग से व्यक्त किया है। उन्होंने चिताओं की तस्वीरें सोशल मीडिया में पोस्ट कर लिखा है –
हृदय इन तस्वीरों को देखने के बाद से क्रंदन कर रहा है। क्या आपको पता है मेरे पास हमारे खेतों की क्या यादें हैं ?
हल-जोल, जोल पर झूला,
लहराती फसल,
बच्चों का सीढ़ीदार खेतों पर क्रिकेट खेलना जहां चौके-छक्के खेत कितना ऊपर-नीचे है उससे तय होता,
यहां शवदाह देखना यादों के टुकड़े होना है
मीनाक्षी ने ट्विटर पर पोस्ट कर कहा है कि -पहाड़ के सीढीनुमा खेतों में भी चिताएं जल रही हैं। ये अल्मोड़ा से 15 किमी दूर भांसवाड़ा की तस्वीर है, जहां आज दोपहर तक 9 शव पहुंच चुके थे। सरकार के मुताबिक़ उत्तराखंड में कोरोना से आज 180 मौतें हुई हैं। लेकिन त्रासदी कहीं ज़्यादा बड़ी है। कोरोना सुदूरवर्ती गांवों तक मार कर रहा है।
इधर मीनाक्षी के इस सोशल मीडिया पर इस हृदयविदारक दृश्य पर लोगों ने अपने-अपने तरीके से राय दी।
शौर्यम शुक्ला ने लिखा- मीनाक्षी जी नमस्कार , मैं भी उत्तराखंड से ही हूं , यहां के हालात बदतर होते जा रहे हैं ,संक्रमण शहर से गांव की ओर बढ़ चुका है , मेरे क्षेत्र में लगातार 4 दिन से मौते हो रही हैं। मौत का नंगा नाच चल रहा द्य आप पत्रकार है कृपया सत्ता में बैठे लोगों तक मेरी बात पहुंचा दीजिए।
दीपेश का कहना है – बहुत दुखद है यह सब पता नहीं कब ठीक होगा। यह सब आपकी पीड़ा को समझ सकता हूं मैं, पर लाचार महसूस कर रहा हूं। कुछ भी कर नहीं सकता।
हनुमान ने लिखा-गांव का वो गुवाड़ जहां रोज शाम सारा गांव इक्कठा बैठा करता था, वो छोटे-छोटे बच्चे जो तरह तरह के खेल खेला करते थे, शहर से गांव आना जन्नत आने जैसा लगता था, भगवान लौटा दो मेरे देश को मेरे गांव को अपनी खुशहाली वापस।
बता दें कि अभी तक उत्तराखंड में कोरोना के दो लाख 44 हजार 273 मामले आए हैं, जिनमें एक लाख 61 हजार 634 स्वस्थ हो गए हैं। फिलवक्त राज्य में 74114 सक्रिय मामले हैं, जबकि 3728 मरीजों की अब तक मौत हो चुकी है। कोरोना के कहर का आलम ये है कि विवाह के महामुहूर्त अक्षय तृतीया पर शहर भर में बंपर शादियां होती हैं। लेकिन, इस बार अक्षय तृतीया पर कोरोना महामारी का साया है। जिसके चलते इस दिन होने वाले विवाह समारोह को लोग टालने लगे हैं।



सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें
👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें
👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें
हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440


