Kanch Tutna

कांच या शीशे का टूटना अशुभ है या शुभ, जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताएं !

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। कांच या शीशे के चटकने और टूटने को लेकर तमाम मान्यताएं पुराने समय से चली आ रही हैं। कुछ लोग इन्हें सच मानकर इनके नियमों को फॉलो करते हैं, वहीं कुछ लोग इस तरह की बातों को फिजूल मानते हैं। यहां जानिए इन मान्यताओं को लेकर धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताओं के बारे में।

  • देखा जाए तो कांच का टूटना एक सामान्य घटना है, ठीक वैसे ही, जैसे असावधानी बरतने पर अन्य चीजें टूट जाती हैं, कांच भी एक वस्तु है जो टूट सकती है। लेकिन पुरानी मान्यताओं के अनुसार लोग कांच या शीशे के टूटने को अशुभ घटना मानते हैं और इसे आने वाले समय में बुरे समाचार से जोड़ते हैं।
  • लेकिन वास्तु के हिसाब से देखा जाए तो कांच या शीशे का टूटना अशुभ नहीं होता, बल्कि शुभ होता है। लेकिन टूटे कांच को घर में रखना जरूर अशुभ हो सकता है। यहां जानिए कांच और शीशे के टूटने को लेकर वास्तु शास्त्र में क्या कहा गया है और इस मामले में विज्ञान क्या कहता है?

शुभ होता है कांच या शीशे का टूटना
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर पर पड़ी कांच की कोई चीज या शीशा अगर किसी कारणवश टूट जाए, तो इसका मतलब है कि आपके घर पर कोई बड़ा संकट आने वाला था, जिसे कांच या शीशे ने अपने ऊपर लेघ् लिया है। यानी अब मुसीबत टल चुकी है और आपका परिवार सुरक्षित हो गया है। इसके अलावा अचानक कांच या शीशे के टूटने का मतलब ये भी होता है कि आपके घर का कोई पुराना मसला अब समाप्त हो गया है। कुछ लोग कांच को लोगों की सेहत से भी जोड़ते हैं, ऐसे में कांच का चटकना या टूटना सेहत ठीक होने का संकेत हो सकता है। इन सभी बातों पर गौर किया जाए तो कांच या शीशे का टूटना एक शुभ संकेत माना जाना चाहिए।

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घर में रखना अशुभ
कांच का टूटना बेशक शुभ संकेत है, लेकिन टूटे या चटके कांच या शीशे को घर में रखना वास्तु के अनुसार अशुभ माना जाता है। ठीक उसी तरह जैसे टूटे बर्तनों में भोजन न करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि टूटे कांच से सकारात्मक ऊर्जा का हृास होता है और घर में नकारात्मकता फैलने लगती है। ऐसे में तमाम परेशानियां घर में आती हैं। इसलिए अब कि बार घर में कभी अचानक से कांच टूट जाए तो बिना शोरशराबा किए, उस कांच को चुपचाप घर से बाहर फेंक दें।

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क्यों माना गया अशुभ जानिए वैज्ञानिक वजह
कांच बहुत नाजुक होता है और शुरुआती समय में इसे दूर देशों से मंगाया जाता था। तब ये बहुत महंगा हुआ करता था। इसकी उपलब्धता के लिए काफी रकम खर्च करनी होती थी और इसे मंगाने में समय भी अधिक लगतंा था। ऐसे में कांच को लोग संभालकर रखें और इसकी देखरेख में सावधानी बरतें, इसलिए इसके टूटने को लेकर तमाम तथ्यों को धर्म और सेहत से जोड़ दिया गया। चूंकि धर्म को लेकर लोगों के मन में हमेशा से ही आस्था रही है और सेहत के प्रति तब लोग काफी सजग हुआ करते थे, इसलिए वे इन तथ्यों में विश्वास करने लगे और समय के साथ ये विश्वास और मजबूत हो गया। (साभार)

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