क्यों अहम है विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर, दो मिनट में पढ़िए चंद्रयान-3 से जुड़ी हर खबर

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समाचार सच, नई दिल्ली (एजेन्सी)। भारत का चंद्रयान-3 मिशन सफल हो चुका है। ठीक 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रयान-3 की चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग हो गई। इसरो ने लैंडिंग से जुड़ा कमांड विक्रम लैंडर को दे दिया था। लैंडिंग के आखिरी 15 मिनट बेहद महत्वपूर्ण थे। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन गया है। बता दें कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कोई भी देश सफल लैंडिंग नहीं कर सका है। भारत ने सफल लैंडिंग कर इतिहास रच दिया है।

चंद्रयान-3 मिशन क्या है?
चंद्रयान-3 मिशन के तहत इसरो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतर कर चांद की सतह का अध्ययन करना चाहता है। मानव गतिविधियों के कारण प्रारंभिक इतिहास पृथ्वी से मिट चुका है लेकिन चांद पर यह संरक्षित है। वैज्ञानिक चांद का अध्ययन कर धरती की उत्पति को समझना चाहते हैं। चांद पर मौजूद रसायनों को गहराई से पढ़ कर चांद के बनने की प्रक्रिया को समझा जा सकेगा।

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क्या है विक्रम लैंडर?
चंद्रयान-3 में विक्रम लैंडर मौजूद है जो चंद्रयान मिशन को चांद की सतह पर पहुंचायेगा। विक्रम लैंडर का नाम भारत के महान साइंटिस्ट विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है।

क्या है प्रज्ञान रोवर?
चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद विक्रम लैंडर के पेट से प्रज्ञान रोवर निकलकर बाहर आ जाएगा। प्रज्ञान रोवर में लगा आधुनिक सेंसर चांद की सतह पर रसायनों की खोज करेगा। सफल लैंडिंग के 4 घंटे बाद विक्रम लैंडर के अंदर से प्रज्ञान रोवर निकलेगा। प्रज्ञान रोवर का मुख्य काम चन्द्रमा की सतह से जानकारी जुटाकर इसरो तक भेजना है। प्रज्ञान रोवर चन्द्रमा की सतह पर पानी की तलाश भी करेगा।

कितने दिन का है मिशन?
बता दें कि विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर सूर्य की ऊर्जा से चलेंगे। विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर पृथ्वी के हिसाब से 14 दिन तक चांद की सतह पर खोज करता रहेगा। बता दें कि पृथ्वी के 14 दिन के बराबर चांद का एक दिन होता है। 14 दिन बाद जब चांद के इस हिस्से में अंधेरा हो जाएगा फिर चंद्रयान-3 मिशन ऊर्जा की कमी के कारण बंद करना पड़ेगा। हालांकि 14 दिन बाद यह यहां फिर सूरज निकलेगा तो रोवर फिर काम करने लगेगा।

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चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर क्यों नहीं है?
इसरो ने चंद्रयान-3 मिशन के साथ ऑर्बिटर नहीं भेजा है। इसरो का कहना है कि साल 2019 में भेजे गए चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अभी भी अच्छे से काम कर रहा है। इसलिए चंद्रयान-3 के साथ ऑर्बिटर को नहीं भेजा गया है। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर विक्रम लैंडर से संचार स्थापित कर चुका है। ऑर्बिटर विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का संचार इसरो से कराएगा।

23 अगस्त का दिन क्यों है खास?
23 अगस्त को चांद पर दिन की शुरुआत होगी इसलिए चंद्रयान-3 को लैंड करने के लिए इस तारीख को चुना गया था। बता दें कि विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर सोलर एनर्जी से ही ऊर्जा लेकर चांद पर खोज का काम करेगी। अभी रोवर प्रज्ञान विक्रम लैंडर की पीठ पर बैठकर चन्द्रमा के चारों तरफ घूम रहा है। 17 अगस्त को प्रोपल्शन मॉडल और लैंडर मॉडल एक दूसरे से अलग किये गए थे और इसके बाद विक्रम लैंडर अकेले ही सफर तय कर रहा है।

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