38 साल… 4.80 लाख पौधे और अब 35 हजार का नया संकल्प! उत्तराखंड में प्राणवायु अभियान बना जनआंदोलन

खबर शेयर करें

15 दिनों में 38 स्थानों पर निःशुल्क बांटे गए फलदार पौधे, पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पन्त बोले- पेड़ बचेंगे तो ही बचेगा भविष्य

समाचार सच, हल्द्वानी।
उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में पर्यावरणविद् एवं पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. आशुतोष पन्त का प्राणवायु के लिए वृहद वृक्षारोपण अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। 14 जुलाई 2026 को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय परिसर में 500 पौधों के रोपण के साथ शुरू हुए श्हरियाली बढ़ाओ अभियानश् के तहत अब तक केवल 15 दिनों में 38 स्थानों पर पौध वितरण और वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

अभियान के अंतर्गत कालाढूंगी, हल्दूचौड़, गौलापार, हल्द्वानी, रामनगर, रानीखेत, द्वाराहाट, नैनीताल, किच्छा, रुद्रपुर, भीमताल, कोटाबाग और ओखलकांडा सहित अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को निःशुल्क फलदार एवं छायादार पौधे वितरित किए गए। कई स्थानों पर स्वयं उपस्थित न हो पाने के बावजूद डॉ. पन्त ने पौधों की व्यवस्था कर अभियान को निरंतर आगे बढ़ाया।

डॉ. पन्त ने बताया कि इस वर्ष 35 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और यह अभियान लक्ष्य पूरा होने तक लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1988 से अब तक व्यक्तिगत संसाधनों से पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों के तहत लगभग 4 लाख 80 हजार पौधे रोपे जा चुके हैं, जबकि प्रतिवर्ष 20 हजार से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया जाता रहा है। इस वर्ष लक्ष्य को और अधिक बढ़ाया गया है।

यह भी पढ़ें -   जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं तो मंगलवार के दिन करें इन खास उपायों को

उन्होंने बताया कि अब तक 15 सघन (मिनी) वन भी विकसित किए जा चुके हैं और वर्तमान में विभिन्न शिक्षण संस्थानों से संपर्क कर उनके परिसरों में भी सघन वन विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

बढ़ता तापमान बना चिंता का विषय
डॉ. पन्त ने कहा कि पृथ्वी पूरे सौरमंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है जहां जीवन संभव है और इसका सबसे बड़ा आधार हरियाली एवं ऑक्सीजन है। विकास के नाम पर जिस तेजी से पेड़ों की कटाई हो रही है, उसके अनुपात में नए पौधे नहीं लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कागजों में लाखों पौधे लगाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति अक्सर निराशाजनक दिखाई देती है।

यह भी पढ़ें -   जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा, किस राशि को मिलेगा धन लाभ और किन राशियों को बरतनी होगी विशेष सावधानी

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण नहीं किया गया तो बढ़ता तापमान, ऑक्सीजन की कमी और अनियमित वर्षा भविष्य में गंभीर संकट पैदा कर सकती है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले।

डॉ. आशुतोष पन्त ने कहा कि पेड़ केवल पर्यावरण नहीं बचाते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का जीवन सुरक्षित करते हैं। यदि आज हमने हरियाली को नहीं बचाया तो भविष्य में स्वच्छ हवा, पर्याप्त वर्षा और सामान्य जीवन केवल कल्पना बनकर रह जाएगा। मेरा प्रयास है कि उत्तराखंड का प्रत्येक गांव हरियाली का संदेशवाहक बने और हर नागरिक पर्यावरण संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझे। आइए, हम सब मिलकर धरती को फिर से हरा-भरा बनाने का संकल्प लें।

डॉ. पन्त ने अभियान को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, पर्यावरण प्रेमियों, स्वयंसेवकों, पत्रकारों एवं शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सहयोग से ही पर्यावरण संरक्षण का यह मिशन निरंतर आगे बढ़ रहा है।

ADVERTISEMENTSAd

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440