समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। अधिकमास वैसे तो बहुत पुण्यकारी माना जाता है। लेकिन भगवान विष्णु के दिए इस मास की तिथियां बहुत लाभकारी बताई गई हैं। एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक अधिकमास की इन तिथियों में स्नान दान और पूजा पाठ का बहुक अधिक फल मिलता है। इस दौरान भगवान श्रीहरि की अराधना और तुलसी की सेवा के साथ विभिन्न उपायों से लाभ मिलता है। इन तिथियों में आप अपने ग्रहों को सही कर सकते हैं। मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद पा सकते हैं। यहां हम बता रहे हैं आपको उन दिनों के बारें में कि इस दिन क्या करें।
अधिकमास की एकादशी भी खास
अधिकमास की एकादशी भी खास है, इसमें मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जाता है। अधिकमास ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि प्रातः 06.22 मिनट तक पश्चात द्वादशी तिथि रहेगी। भद्रा प्रातः 06.22 मिनट तक। इसे पुरुषोत्तम कमला एकादशी व्रत भी कहते हैं। इसकी कथा में भी जिक्र है कि इस एकादशी पर व्रत करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
अधिक मास प्रदोष व्रत, मिलेगी शिवजी की भी कृपा
भले ही यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनो एक ही हैं। प्रदोष व्रत अधिकमास में और भी अधिक पुण्यकारी हो जाता है। इस दिन विष्णु जी के साथ भगवान शिव की कृपा भी मिलती है। प्रदोष व्रत उस दिन होता है, जिस दिन द्वादशी और त्रयोदशी का संयोग हो। प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से कुंडली के सभी ग्रह दोष खासकर शनि और राहु के दूर होते हैं। 28 मई (गुरुवार) को अधिक मास ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी तिथि प्रातः 07.58 मिनट तक पश्चात त्रयोदशी तिथि। प्रदोष व्रत।अधिक मास) ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि प्रातः 09.51 मिनट तक पश्चात चतुर्दशी तिथि।
अधिक मास की पूर्णिमा
अधिक मास की पूर्णिमा के दिन आप मां लक्ष्मी का लाभ पा सकते हैं। इस दिन श्रीहरि की पूजा करें, जहां श्रीहरि वहां मां लक्ष्मी इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी के साथ श्रीहरि के पूजा करें। अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं। इसलिए इस पूर्णिमा पर श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। पवित्र नदियों में स्नान और दान करें। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी जाती है। इस बार अधिकमास की पूर्णिमा शनिवार और रविवार दोनों दिन रहेगी। व्रत की पर्ू्णिमा शनिवार को और स्नान दान की पूर्णिमा रविवार को रहेगी। इस दिन पितरों के लिए तर्पण और दान और दीपदान भी बहुत खास माना गया है।
कब है व्रत वाली पूर्णिमा और स्नानदान वाली पूर्णिमा
30 मई (शनिवार) : अधिक मास ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी तिथि प्रातः 11.58 मिनट तक पश्चात पूर्णिमा तिथि। भद्रा प्रातः 11.58 मिनट से रात्रि 01.06 मिनट तक। श्री सत्यनारायण व्रत। व्रत की पूर्णिमा। 31 मई (रविवार) अधिक मास ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि दोपहर 02.15 मिनट तक पश्चात प्रतिपदा तिथि। ज्येष्ठी योग। स्नान-दानादि की अधिक मासीय ज्येष्ठी पूर्णिमा। गंडमूल सायं 04.12 मिनट से। (पं. ऋभुकांत गोस्वामी)



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