ख़राब गले को ठीक करने के लिए पांच आयुर्वेदिक नुस्ख़े

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। प्रदूषण, खांसी और मौसमी फ्लू हमारे गले को ख़राब करने का मुख्य कारण बनते हैं और इस वजह से हमारी संपूर्ण प्रतिरक्षा भी प्रभावित होती है। कोरोना जैसी महामारी के बीच, यह बहुत ही ज़रूरी हो जाता है कि आप अपने ख़राब गले को ज़ल्दी से ठीक करें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि आपकी दिनचर्या ऐसी हो, जो आपको स्वस्थ रहने में मदद करती हो।
इसके अलावा कुछ पारंपरिक एलोपैथिक दवाओं की आवश्यकता होती है, जो हमें इन बीमारियों से उबरने में मदद करती है लेकिन यह लंबे समय के इस्तेमाल के बाद असर करती हैं। इसके अलावा हमें एक दीर्घकालिक समाधान की भी आवश्यकता है, जो हमारे शरीर को इंफ़ेक्शन से लड़ने के लिए स्वस्थ और मज़बूत बनाने के साथ ज़ल्दी से ठीक भी कारगर हों। और इन सबके लिए हम आपको कुछ चीज़ों के बारे में बता रहे हैं, जो आपके अपने गले के स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए रोज़ाना इस्तेमाल करना चाहिए।

गर्म पानी पिएं
आयुर्वेद के अनुसार, गर्म पानी पीने के अनगिनत फ़ायदे हैं। यह शरीर में वसा की मात्रा कंट्रोल करने के साथ ही पाचन क्रिया को ठीक रखने में मदद करता है। यह ब्लड सर्कुलेशन को सुधारने का भी काम करता है। यदि काम करते समय आप गर्म पानी पीते हैं, तो यह तनाव को कम करते हुए आपको अधिक सतर्क बनाता है. इसलिए गर्म पानी पिएं। इसके अलावा, आप इसे सुबह की पहली खुराक और रात की आख़िरी खुराक भी बना सकते है, ताकि दिन के समय खाए गए तेलीय खाद्य पदार्थों से आपका श्वसन तंत्र मुक्त हो सके। गले में किसी तरह की परेशानी रहे, तो रात के समय गर्म पानी में नमक मिलाकर उससे गरारा करें।

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रात में दही से परहेज करें
आयुर्वेद में, तीन दोष (जीवन शक्ति) हैं, जिनमें से एक कफ़ है, जो रात के समय हमारे शरीर में स्वाभाविक रूप बढ़ती है। दही के सेवन से कफ़ ज़्यादा बढ़ती है और कफ़ दोष के असंतुलन से हमारे शरीर में बलगम अधिक बढ़ता है। गले में एलर्जी और खराश भी हो सकती है। इसलिए रात में दही खाने से बचें, ख़ासकर अगर आपको सर्दी और खांसी होने की आशंका हो।

मॉर्निंग कॉफ़ी को हल्दी वाली चाय से बदलें
हल्दी को अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे बहुत ही फ़ायदेमंद मसाला है माना जाता है जिसे कई बीमारियों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह इंन्फ़लिमेशन को कम करने से लेकर सूजन और नॉर्मल सर्दी-जुक़ाम को ठीक करने में मदद करता है। अगली बार जब आप आपको चाय की तलब लगे, तो हल्दी लट्टे या किसी आयुर्वेदिक हल्दी टी का प्रयोग करें. बस एक पैन में एक कप पानी डालें और उसमें हल्दी, अदरक और लौंग डालकर 10 मिनट तक उबालें। आपको मन हो, तो इसमें दूध मिलाएं या ब्लैक टी की तरह ही इस्तेमाल करें. पीने से पहले अच्छी तरह से मिला लें।

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गले की देखभाल के लिए प्राणायाम
आयुर्वेद के अनुसार एक स्वस्थ शरीर के लिए नियमित रूप से प्राणायाम करना सबसे अधिक लाभकारी है। इसलिए गले को स्वस्थ्य रखने के लिए हम आपको सिम्हासन करने की सलाह देंगे। आप इस प्राणायाम को करने के लिए कैट-काउ पोज़िशन पर आएं। जब आप अपने बूटक्स को ऊपर ले जाते समय अपने स्टमक को नीचे की तरफ़ लाएं। अब सामने की तरफ़ देखें। अपनी जीभ को बाहर निकालें और मुंह से तेज़ी से सांस छोड़ें. यह प्राणायाम एक साफ़ और स्वस्थ्य गले के लिए है।

गले की देखभाल के लिए आयुर्वेद
भारत में प्राचीन काल से कई सारी बीमारियों को ठीक करने के लिए आयुर्वेद का इस्तेमाल होता आया है। इनका इस्तेमाल बिल्कुल सुरक्षित है और इस्तेमाल करनेवाले पर किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होता है। गले को ठीक रखने के लिए रात के समय आयुर्वेदिक दवाओं से गरारा करना एक बहुत ही बढ़ियां तरीक़ा साबित हो सकता है।

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