समाचार सच, चमोली। बदरीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला अब लगातार नए मोड़ ले रहा है। एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में नए चेहरे और नए सवाल सामने आ रहे हैं। शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए मंदिर समिति के पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, राजेंद्र चौहान की गिरफ्तारी उन साक्ष्यों के आधार पर की गई है जो जांच के दौरान सामने आए। इससे पहले इसी मामले में प्रमोद नौटियाल को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। अब एसआईटी पूरे प्रकरण की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
जांच में सबसे अहम भूमिका सीसीटीवी फुटेज निभा रही है। जांच अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध वीडियो में राजेंद्र चौहान कथित रूप से चढ़ावे की नकदी अपनी जेब में रखते हुए दिखाई दिए हैं। इसी आधार पर उनसे बदरीनाथ धाम में लंबी पूछताछ की गई और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
हालांकि, इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल गायब CCTV रिकॉर्डिंग को लेकर खड़ा हो गया है। सूत्रों के अनुसार मंदिर समिति ने पहले जांच एजेंसी को 45 दिन की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने की जानकारी दी थी, लेकिन एसआईटी को अब तक केवल 13 दिन का फुटेज ही मिला है। बाकी 32 दिन की रिकॉर्डिंग की तलाश और डेटा रिकवरी की प्रक्रिया जारी है।
एसआईटी का मानना है कि यदि शेष फुटेज बरामद हो जाती है तो मामले में कई नए खुलासे हो सकते हैं और अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। जांच एजेंसी की नजर अब मंदिर समिति के कुछ अन्य कर्मचारियों पर भी है और आने वाले दिनों में उनसे पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल, बदरीनाथ चढ़ावा प्रकरण में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और यह मामला उत्तराखंड के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है।



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